गणेश ध्यान

श्री सिद्धि विनायको विजयतेतराम,

गणेश भगवान शिव तथा माँ पार्वती के पुत्र हैं,जिनकी पूजा सभी कार्यों में सबसे पहले की जाती है,गणेश जी का पूजन सभी प्रकार के विघ्नों को नाश करने के लिए तथा अविघ्नता पूर्वक अपने कार्य की सिद्धि के लिए किया जाता है,साथ ही भगवान गणेश बुद्धि के दाता हैं उनकी पूजा स्तुति,एवं आराधना से तीव्र बुद्धि की भी प्राप्ति होती है !तो आईये जानते है भगवान गणेश जी के उन मंत्रों,स्तुतियों को जिनसे गणेश भगवान शीघ्र प्रशन्न होते हैं!

गणपति ध्यान मंत्र

सिन्दूरवर्णं द्विभुजं गणेशं लम्बोदरं पद्मदले निविष्टम ।

ब्रह्मादिदेवैः परिसेव्यमानं सिध्दैर्युतं तं प्रणमामि देवम ।।

गणेश स्तुति

अविरलमदधाराधौतकुम्भः शरण्यः

फणिवरवृतगात्रः सिध्दसाध्यादिवन्द्यः ।

त्रिभुवनजनविघ्रध्वान्तविध्वंसदक्षो

वितरतु गजवक्त्त्रः संततं मंगलं वः ।।

ओंकारसंनिभमिभाननमिन्दुभालं

मुक्ताग्रबिन्दुममलद्युतिमेकदन्तम।

लम्बोदरं कलचतुर्भुजमादिदेवं

ध्यायेन्महागणपतिं मतिसिध्दिकान्तम ।।

सिन्दूराभं त्रिनेत्रं पृथुतरजठरं हस्तपद्मैर्दधानं

दन्त पाशांकुशेष्टान्युरुकरविलसद बीजपूराभिरामम ।

बालेन्दुद्योतमौलिं करिपतिवदनं दानपूरार्द्रगण्डं

भोगीन्द्राबध्दभूषं भजत गणपतिं रक्तवस्त्रांगरागम ।।

रक्तो रक्तांगरागांशुककुसुमयुतस्तुन्दिलश्चन्द्रमौलि-

र्नेत्रेर्युक्तस्त्रिभिर्वामनकरचरणो बीजपूरान्तनासः ।

हस्ताग्रक्लृप्तपाशांकुशरदवरदो नागवक्त्रोअ्हिभूषो

देवः पद्मासनो वो भवतु नतसुरो भूतये विघ्नराजः ।।

मुक्ताकांचननीलकुन्दघुसृणच्छायैस्त्रिनेत्रान्वितै-

र्नागास्यैर्हरिवाहनं शशिधरं हेरम्बमर्कप्रभम ।

दृप्तं दानमभीतिमोदकरदान टंकं शिरोअ्क्षात्मिकां

मालां मुद्ररमंकुशं त्रिशिखिकं दोर्भिर्दधानं भजे ।।

वीणां कल्पलतामरिं च वरदं दक्षे विधत्ते करै-

र्वामे तामरसं च रत्नकलशं सन्मंजरीं चाभयाम ।

शुण्डादण्डलसन्मृगेन्द्रवदनः शंखेन्दुगौरः शुभो

दिव्यद्रत्ननिभांशुको गणपतिः पायादपायात स नः ।।

क्रोडं तातस्य गच्छन विशदबिसधिया शावकं शीतभानो-

राकर्षन बालवैश्वानरनिशितशिखारोचिषा तप्यमानः ।

गंगाम्भः पातुमिच्छन भुजगपतिफणाफूत्कृतैर्दूयमानो

मात्रा सम्बोध्य नीतो दुरितमपनयेद बालवेषो गणेशः ।।

विध्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय,

लम्बोदराय सकलाय जगत् हिताय ।

नागाननाय श्रुतियज्ञभूषिताय,

गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते ।।

निर्विघ्न कर्ता गणेश जी के १२ नाम

गणेश जी के ऐसे १२ नाम है जो सभी प्रकार के विघ्नों को शंट कर देते हैं,इन नामों का स्मरण विद्यारम्भ,विवाह,गृह प्रवेश,यात्रा ,युद्ध में जाते हुए इनका स्मरण करना चाहिए,ऐसा करने से सभी उपद्रवों का नाश होता है तथा सर्वत्र विजय होती है!

गणेश ध्यान मंत्र

ऊँ समुखश्चैकदंतश्च कपिलो गजकर्णकः ।

लंबोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायकः ।।

धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः गजाननः ।

द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छृणुयादपि ।।

विध्यारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा तथा ।

संग्रामे संकटै चैव विघ्नस्तस्या ना जायते।।

शुक्लाम्भरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजम् ।

प्रसन्नवदनं ध्यायेत्सर्वविघ्नोपशान्तये ।।

गणेश का ध्यान –

खर्वं स्थूलतनुं गजेन्द्रवदनं लम्बोदरं सुन्दरं

प्रस्यन्दन्मदगन्धलुब्धमधुपव्यालोलगण्डस्थलम् ।

दन्ताघातविदारितारिरुधिरैः सिन्दूरशोभाकरं

वन्दे शैलसुतासुतं गणपतिं सिध्दिप्रदं कामदम् ।।

भगवान गणेश का ध्यान

गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम् ।

उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम् ।।

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