ज्योतिष

ज्योतिष शास्त्र का सम्पूर्ण ज्ञान

वेदांगों में ज्योतिष शास्त्र का महत्वपूर्ण स्थान है,विश्व साहित्य के आदि ग्रन्थ वेद हैं

उन वेदों के सम्यक ज्ञान के लिए वेदांगों के अध्ययन की अतीव आवश्यकता होती है!

वेदांग छः है शिक्षा,कल्प,व्याकरण,निरुक्त,छन्द और ज्योतिष,

प्रत्येक वेदांग का अपना ही एक विशेष महत्व है,इस पेज पर हम आपको ज्योतिष का मूलतः बिंदु बद्ध अध्ययन करवाएंगे

और ज्योतिष के अलौकिक तथ्यों से आपको अवगत करवाएंगे।

ज्योतिष के भाग

ज्योतिष शास्त्र मूलतः तीन भागों में विभक्त है सिद्धान्त,संहिता और होरा,इन तीनों ही स्कंदों का अध्ययन एक ज्योतिषी के लिए अतीव आवश्यक है

अगर कोई पाठक इनमें से किसी एक मात्र का अध्ययन करके भविष्यवाणियां करता है

वराह मिहिर आचार्य के मत से वह ज्योतिषी नक्षत्र सूची,चांडाल है

और वह हर प्रकार से शुभ कर्मों में बहिष्कृत है।

ग्रन्थ

ज्योतिष शास्त्र का मूल अगर किसी को कहा जा सकता है तो वह है सिद्धान्त,

सिद्धान्त ग्रन्थों में सृष्टि के आदि से लेकर वर्तमान तक कि काल गणना का बहुत ही रोचक वर्णन है!

अन्य

सिद्धांत ग्रंथों में ग्रहों की कक्षाओं,ग्रहों की गणनाओं,स्थिति,इत्यादि का सूक्ष्म वर्णन प्राप्त होता है

,साथ ही भूगोल के रोचक तथ्य सिद्धान्त ग्रन्थों में वर्णित है

जिनका शोध अगर सुष्ठु प्रकार से किया जाए तो आधुनिक वेधशालाओं को एक नया आयाम मिल सकता है।

सिद्धान्त ग्रन्थों में सूर्य सिद्धान्त,ब्रह्मस्फुट सिद्धात,पंचसिद्धान्तिका,सिद्धान्तशिरोमणि,आर्यभटियं इत्यादि ग्रंथ महत्वपूर्ण हैं,सिद्धान्त ग्रन्थों के प्रमुख रचनाकार,लगध,लाटदेव,भास्कराचार्य,वराहमिहिर,ब्रह्मगुप्त,बापुदेव शास्त्री,आर्यभट्ट इत्यादि प्रमुख हैं।

संहिता

ज्योतिष शास्त्र में सहिंता भाग ज्योतिष का प्रमुख भाग है

इसमें प्राकृतिक घटनाओं का वर्णन,भूगोल,गणित,फलित,भूकंप,भूमिगत जल,धन,उल्का पिंडों का अध्ययन इत्यादि न जाने कितने ही अद्भुत विषयों का समावेश रहता है!

संहिता ग्रन्थों में आचार्य वराहमिहिर की बृहतसहिंता सुप्रसिद्ध है।

होरा

ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से वर्तमान में अगर किसी स्कंद का सबसे अधिक प्रयोग है तो वह है होरा,होरा

जातक के जन्मकालीन इष्ट आदि के आधार पर लग्न निर्माण कर अनेकों प्रकार की कुंडलियों की रचना की जाती है

और जातक के भूत वर्तमान एवं भविष्य कालिक घटनाओं की सटीक भविष्यवाणियां की जाती है।

होरा ग्रन्थों में बृहत पाराशर होरा शास्त्र,बृहज्ज़ातक इत्यादि प्रमुख ग्रन्थ हैं।

विशेष

ज्योतिष शास्त्र एक प्रत्यक्ष शास्त्र है जिसके संदर्भ में एक विशेष उक्ति कहि गयी है।

।।अप्रत्यक्षम् सर्व शस्त्राणि विवादस्तेषू केवलं।

प्रत्यक्षम् ज्योतिषम् शास्त्रं चन्द्र आर्को यत्र साक्षीणौ।।

(Visited 939 times, 1 visits today)

Pages: 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *