ज्योतिष

शकुनशास्त्र


ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि में शकुन का भी बड़ा महत्व है । शकुन चाहे स्वप्न में हो या जाग्रत दशा में हो , अपने
शरीर में हो , चाहे संसार में , पशु ,पक्षियों द्वारा हो या दिव्य शक्तियों द्वारा – प्रत्येक दशा में उनका तातपर्य है
, हमें सावधान करना और आश्वासन देना । कोई भी व्यक्ति किसी कार्य का आरम्भ अथवा यात्रा आदि
का प्रारम्भ सफलता की दृष्टि से शुभ मुहूर्त में करना चाहता है , इसके साथ ही शकुन देखने की भी परम्परा
है ।

शकुन के प्रकार

शकुन शुभ और अशुभ दोनों प्रकार के होते हैं । शुभ मुहूर्त में शुभ शकुन के प्राप्त होने पर यात्रा अथवा
कार्य आदि की सफलता निश्चित । जो व्यक्ति यात्रा करता है । अथवा कार्य प्रारंभ करते हैं वह शुभ शकुन
प्राप्त होने पर कार्य की सफलता के लिए मानसिक रूप से पूर्ण आश्वस्त हो जाता है ,और प्रायः परिणाम
भी अनुकूल होते है ।

इस प्रकार जीवन में शकुन की महिमा कम नही है । वर्तमान समय में बहुत सारे शुभ
शकुन तथा अशुभ शकुन किंवदन्तियों पर भी आधारित है । ये किंवदन्तियाँ प्रायः शकुनशास्त्र के अनुसार
परम्परा से बंध गयी हैं । सामान्यता यात्रा के समय सवत्सा गौ सामने से आती हो ,सौभाग्य स्त्री अपने पुत्र
को गोद में लेकर आती हो , किसी वृद्ध व्यक्ति का शव समारोह पूर्वक बाजे गाजे के साथ आता हो ,जल
से भरे हुए दो घड़े मार्ग में मिलते हों अथवा दही से पूर्ण पात्र दिखे तो इन्हें अपने दाहिने ओर करके जाने
पर यात्रा शुभ होती है,ये शुभ शकुन है ।

अशुभ शकुन

इसी प्रकार अशुभ शकुनों की भी सूची है । यात्रा के समय यदि
कोई एक चक्षु व्यक्ति मार्ग में मिल जाये ,कोई नाई अपने औजार के डिब्बे के साथ मिल जाये ,कोई विधवा
ब्राह्मणी ,खाली घड़ा आदि मार्ग में मिल जाये अथवा कोई छींक दे तो अशुभ शकुन की सूचना मानी
जाती है और प्रायः इसके अशुभ परिणाम होते भी हैं ।

शुभ शकुन


इसके अतिरिक्त पशु -पक्षियों के द्वारा भी शुभ अशुभ की सूचना प्राप्त होती है । जैसे दशहरा -दीपावली
पर नीलकण्ठ पक्षी का दर्शन , सवत्सा गोमाता का दर्शन ,नेवले का दर्शन , मीनयुगम ( मछलियाँ ) आदि
के दर्शन शुभ होते हैं इसी प्रकार नाग ,हिरण,आदि के दर्शन भी शुभ होते हैं ।

मिश्रित शकुन

गिरगिट के स्पर्श होने पर ,छिपकली के शरीर पर गिरने पर शुभ अशुभ दोनों प्रकार के फल प्राप्त
होते हैं । दाहिने अंग पर पड़ने से शुभ की सूचना मिलती है । तथा बाएँ अंग पर पड़ने से अनिष्ट का
संकेत मिलता है । पशु – पक्षियों से अशुभ की सूचना भी मिलती है । बिल्ली द्वारा रास्ता काटे
जाने पर ,कुत्ते के कान फड़फड़ाने पर ,कुत्ते एवं सियार के रोने पर गिद्ध के मकान आदि पर बैठने
से , कौवे के शोर मचाने पर अशुभ संकेत प्राप्त होते हैं पुरुष का दाँया अंग और स्त्री का बाँया
अंग फड़कना शुभ होता है । इसके विपरीत अशुभ होता है ।

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