ज्योतिष

भगवान् सूर्य का परिवार

भगवान् सूर्य की दस सन्तानें हैं । विश्वकर्मा की पुत्री संज्ञा नामक पत्नी से वैवस्वत मनु , यम , यमी ,
अश्विनी कुमार द्वय और रेवन्त तथा छाया से शनि , तपती , विष्टा और सावर्णि मनु हुए ।
भगवान् सूर्य के परिवार की यह कथा पुराणों आदि में अनेक प्रकार से सूक्ष्मं एवं विस्तार से आयी है ,


उसका सारांश यहाँ प्रस्तुत है –


विश्वकर्मा की पुत्री संज्ञा से जब सूर्य जा विवाह हुआ तब अपनी प्रथम तीन सन्तानों वैवस्वत मनु , यम
ओर यमी की उत्तप्ति के बाद उनके तेज को न् सह सकने के कारण संज्ञा अपने ही रूप आकृति तथा
वर्णवाली अपनी छाया को वहां स्थापित कर अपने पिता के घर होती हुई उत्तरकुरु में जाकर छिपकर
अश्वा का रूप धारण कर अपनी शक्तिवृद्धि के लिए कठोर तप करने लगी ।

इधर सूर्य ने छाया को ही
पत्नी समझा तथा उससे उन्हें सावर्णि , मनु , शनि , तपती तथा विष्ट ये चार संतानें हुई । जिन्हें वे अधिक
प्यार करती थी किन्तु संज्ञा की सन्तानों वैवस्वत मनु तथा यम एवं यमी का निरन्तर तिरस्कार करती रहती

याम सूर्य संवाद


माता छाया के तिरस्कार से दुःखी होकर एक दिन यम ने पिता सूर्य से कहा – तात ! यह छाया हम लोगों
की माता नही हो सकती , क्योंकि यह सदा हमारी उपेक्षा , ताड़ना करती हैं और सावर्णि मनु आदि को
अधिक प्यार करती हैं यहाँ तक उसने मुझे शाप भी दे डाला है ।

सन्तान माता का कितना भी अनिष्ट करे ,
किंतु वह अपनी संतान को कभी शाप नही दे सकती । यम की बातें सुनकर कुपित हुए सूर्य ने छाया से
ऐसे व्यवहार का कारण पूछा और कहा कि सच सच बताओ कि तुम कौन हो ? यह सुनकर छाया भयभीत
हो गयी और उसने सारा रहस्य प्रकट कर दिया कि मैं संज्ञा नही , बल्कि उसकी छाया हूँ ।

(Visited 873 times, 1 visits today)

Pages: 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *