ज्योतिष

नक्षत्र सूची कौन होता है !

नक्षत्र सूची कौन है


अविदित्वैव यः शास्त्रं दैवज्ञत्वं प्रपद्यते ।
स पंक्तिदूषकः पापो ज्ञेयो नक्षत्रसूचकः ।।


जो पुरुष ज्योतिषशास्त्र को जाने बिना दैवज्ञ बन जाए उस पापात्मा पंक्तिदूषक को नक्षत्रसूची जानना
चाहिए ।

तिथ्युत्पत्तिं न जानन्ति ग्रहाणां नैव साधनम् ।
परवाक्येन वर्तन्ते ते वै नक्षत्रसूचकाः ।।

तिथि की उतपत्ति को जो नही जानते ग्रहों के साधन का ज्ञान जिन्हें नही है केवल दूसरे के कहे सुने के
अनुसार जो व्यवहार करते है वे नक्षत्रसूचक कहलाते है ।

त्रिस्कन्धपारङ्ग एव पूज्य
श्राद्धे सदा भूसुरवृन्दमध्ये ।
नक्षत्रसूची खलु पापरूपो
हेयः सदा सर्वसुधर्मकृत्ये ।।

श्राद्ध कर्म में ब्राह्मण समुदाय के मध्य ज्योतिष के तीनों स्कंधों का पारगामी विद्वान् ही पूज्य है ।
नक्षत्रसूची निश्चित रूप से पापात्मा है वह उसी उत्तम धार्मिक कृत्यों में सदा ही निंद्य है ।


दशादिनकृत्तपापं हन्ति सिद्धान्तवेत्ता
त्रिदिनजनितदोषं तन्त्रविज्ञः स एव ।
करणभगणवेत्ता हन्त्यहोरात्रदोषं
जनयति घनमंहश्चात्र नक्षत्रसूची ।।

सिद्धान्त ज्योतिष का ज्ञाता दस दिन में किये हुए पापों को नष्ट कर डालता है । संहिता का ज्ञान कर लेने
पर वह तीन दिनों में किये गए पापरूपी दोष को विनष्ट कर देता है और होराशास्त्र की जानकारी कर लेने
पर अहोरात्र (दिन -रात ) के दोष को दूर कर देता है किंतु नक्षत्र सूची तो महान पाप ही उत्पन्न करता है ।

गृहे गृहे गत्वापृष्ट एष नक्षत्राव्यश्विन्यादीनि ।
शुभाशुभफलसूचकानि सूचयतीति नक्षत्रसूची ।।

जो घर घर जाकर बिना पूछे ही (अपना पाण्डित्य दिखाने के लिए ) अश्विनी आदि नक्षत्रों (तथा ग्रहों
आदि ) के शुभाशुभ फल को बताने लगता है वह नक्षत्र सूची कहलाता है ।

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