भगवान गणेश की अग्र पूजा क्यों

प्रथम पूजन क्यों

हमारी संस्कृति में किसी भी कार्य को करने से पहले या किसी भी उत्सव को मनाने से पहले गणेश जी की
पूजा की जाती है ।
शास्त्रों के अनुसार सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाए तो हर काम में सफलता प्राप्त होती है ।

किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले आखिर क्यों गणेश जी का ही पूजन किया जाता है,गणेश जी को
विघ्नहर्ता कहा जाता है गणेश जी सभी विघ्नों को हरने बाले है, इसलिए किसी भी प्रकार के पूजन और
अनुष्ठान आदि में विघ्नों और बाधाओं को दूर करने के लिए गणेश जी की पूजा करनी चाहिए । गणेश
जी का प्रथम पूजन करने से गणेश जी की कृपा हमेशा बनी रहती है

प्रचलित कथा


एक बार सभी देवी देवताओं में इस बात को लेकर वाद-विवाद हो गया कि किस देवी देवता की पूजा पहले होगी
। पृथ्वी पर प्रथम पूजन के अधिकार को पाने के लिए सभी देवी देवता स्वंय को श्रेष्ठ बतलाने लगे । जब
कोई समाधान नही निकला तब देवर्षि नारद जी ने सभी देवी देवताओं को भगवान शिव जी के पास जाने
को कहा और सभी देवी देवता भगवान शिव के पास जाकर अपनी बताते हैं । भगवान शिव ने सभी
देवताओं की समस्या का समाधान करने के लिए एक प्रतियोगिता रखी जिसमें यह शर्त रखी गयी कि जो
भी देवी देवता सबसे पहले सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की परिक्रमा लगाकर आएगा वही सर्वप्रथम पृथ्वी पर प्रथम
पूजन का अधिकारी होगा ।

तत्पश्चात

भगवान शिव की यह शर्त सुन कर सभी देवता अपने अपने वाहनों पर सवार
होकर ब्रह्माण्ड की परिक्रमा के लिए चले गए । परंतु गणेश जी नही गए और वही खड़े होकर कुछ
समय सोच कर वह अपने माता पिता की परिक्रमा करने लग गए । तब शिव पार्वती ने गणेश जी से पूछा
कि आप पृथ्वी की परिक्रमा करने की बजाय हमारी परिक्रमा क्यों कर रहे हो तब गणेश जी बोले कि मेरा
सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड मेरे माता पिता है इसलिए मैंने यथार्थ ब्रह्माण्ड की परिक्रमा की है ।


इतने में कार्तिकेय अपने मयूर पर सवार होकर पृथ्वी का चक्कर लगाकर लौटे और बोले कि इस
प्रतियोगिता में मैं विजय हुआ हूँ । इसलिए पृथ्वी पर प्रथम पूजन का अधिकारी भी मैं ही हूँ । लेकिन भगवान
शिव बोले कि तुमसे पहले गणेश ने सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की परिक्रमा की है इसलिए पृथ्वी पर प्रथम पूजन का
अधिकारी गणेश है तब कार्तिकेय गुस्से में बोले कि ये कैसे सम्भव हो सकता है क्योंकि गणेश को अपने
वाहन मूषक पर बैठकर सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की परिक्रमा करने में कई वर्ष लग जाएंगे ।

अन्य देवताओं द्वारा स्वीकृति

इतने में सभी देवता भी आ जाते हैं तब भगवान शिव सबको बताते है कि गणेश ने अपने माता पिता की परिक्रमा करके यह
प्रमाणित कर दिया है माता पिता ही सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड से बढ़कर है और गणेश ने इस बात का ज्ञान सम्पूर्ण
ब्रह्माण्ड को कराया है और सभी देवताओं ने गणेश जी को ही पृथ्वी पर प्रथम पूजन का अधिकारी माना ।

इसलिए कहा जाता है कि माता पिता के आशीर्वाद में इतनी शक्ति होती है कि साधारण व्यक्ति को भी
असाधारण योग्यता और सम्मान दिला सकती है इसलिए अपने माता पिता की सेवा करे और उनको
हमेशा सम्मान दें ।जिसका साक्षात् प्रमाण है भगवान गणेश,जिन्होंने अपने माता पिता को प्रशन्न करके इस ब्रह्माण्ड में अग्र पूजक होने का अधिकार प्राप्त किया है !शास्त्र भी कहते हैं पितरः प्रीतिमापन्ने प्रीयन्ते सर्व देवताः

गणेश जी को प्रसन्न कैसे करे

गणेश जी को जल स्नान करवाने से जीवन से सारे दुःख खत्म हो जाते है और हर प्रकार का सुख प्राप्त
होता है और विद्या संतान और मोक्ष की प्राप्ति होती है ।

गणेश जी को सफेद पुष्प चढ़ाने से कीर्ति प्राप्त होती है ।

सिंदूर और दूर्वा चढ़ाने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है और आर्थिक उन्नति प्राप्त होती है और संतान का
सुख मिलता है ।

गणेश जी को लड्डू चढ़ाने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है

गणेश जी को दूर्वा चढ़ाता है उसे तीव्र बुद्धि की प्राप्ति होती है!लाजा {खिलें]चढ़ाने से अखंड यश की प्राप्ति होती है

गणेश जी को सफेद दूर्वा सबसे अधिक प्रिय है जो की अवश्य ही चढ़ानी चाहिए !

न चढ़ाने योग्य

न तुलस्या गणाधिपं गणेश जी को तुलसी कभी भी नहीं चढ़ानी चाहिए !तुलसी को छोड़ कर गणेश जी को सभी प्रकार के पत्र एवं पुष्प प्रिय होते हैं!

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