शक्तिपीठों के प्रादुर्भाव की कथा

शक्ति पीठों का का प्रादुर्भाव

इसी प्रकार छाया सती के शरीर के अंग – प्रत्यंग धरातल पर गिरने से ५१ शक्तिपीठ बन गए
अङ्गप्रत्याङ्गपातेन छायासत्या महीतले ।
शक्तिपीठों की इस उद्भव कथा का वर्णन कहीं संक्षेप में और कहीं विस्तार से विभिन्न पुराणों एवं शाक्त

  • शैव ग्रन्थों में पाया जाता है इनकी संख्या भी भिन्न भिन्न बतायी गयी है । जैसे तन्त्रचूड़ामणि में शक्तिपीठों
    की संख्या ५२ बतायी गयी है । देवीभागवत में १०८ और देवीगीता में ७२ । कुछ अन्य ग्रन्थों में भी पीठों
    की संख्या भिन्न भिन्न पाई जाती है । यूँ तो जगदम्बा की उपासना के जाग्रत धाम अनेक स्थानों पर विख्यात
    है और जनसामान्य में उनके प्रति अगाध श्रद्धा भी है । किंतु देवीपुराण में शक्तिपीठों की संख्या ५१
    बतायी गयी है।
    तथा परम्परागत रूप से भी देवीभक्तों और सुधीजनों में ५१ शक्तिपीठों की विशेष मान्यता
    है ।

(Visited 37 times, 1 visits today)

One comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *