शक्ति – सर्वस्वरूपिणी है

शिव शक्तिमय

यहाँ यह भी स्मरणीय है कि शिव
शक्ति की समानता है । पुराणों में कथा है कि जो केवल शिव या विष्णु की उपासना करते हैं और शक्ति
जी पूजा नही करते , वे शापग्रस्त हो जाते हैं त्रिपरोपनिषत् में कहा गया है – भगवान शक्तियुक्त होकर
जगत् के विधाता , धर्ता , हर्ता , और विश्वरूप तत्त्व को प्राप्त होते है –


भग: शक्तिर्भगवान काम ईश उभा दाताराविह सोभगानाम ।
सम्प्रधानो समस्ततत्वो समोजौ तयोः शक्तिरजरा विश्वयोनिः।।


इस जगत् में कुछ देखा जाता है वह केवल चिह्निष्पदंश है । चिति के अतिरिक्त अन्य वस्तु की संभावना
नहीं है जो शाशवत रूप से रहे । अतएव समाहित चित्त से नित्य तृप्तभाव से तथा समाधिनिष्ठा से उस
पराशक्ति के दर्शन का प्रयास करना चाहिए । अन्नपूर्णा उपनिष्त में कहा गया है


यावत्सर्वं न सन्त्यक्तं तावदात्मा न लभ्यते ।
सर्ववस्तुपरित्यागे शेष आत्मेति कथ्यते ।।
आत्मावलोकनार्थं तु तस्मात्सर्वं परित्यजेत् ।
सर्वं सन्त्यज्य दूरेण यच्छिष्टं तन्मयो भव ।।
सर्वं किञ्चिदिदं दृश्यं दृश्यते यज्जगद्रतम् ।
चिन्निष्पन्दांशमात्रं तत्रान्यत्किञ्चन शाश्वतम् ।।

राम नाम महिमा

विष्णु , शिव और ललिता की सहस्रनामवलि लोक में अधिक प्रसिद्ध है । ये नामवालियाँ
मोक्षफलकारक है इसमें कोई संदेह नही । विष्णुसहस्रनाम में यह बताया गया है कि जो लोग समयाभाव
या किसी कारण से शीघ्र ही सहस्रणामपाठ का फल पाना चाहते हैं वे तीन बार राम नाम का जप करेंगे तो
यथोक्त फल के अधिकारी होंगे । शिवजी की उक्ति पार्वती के प्रति –


राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ।।

(Visited 146 times, 1 visits today)

2 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *