शक्ति – सर्वस्वरूपिणी है

शक्ति नाम की श्रेष्ठता


ललितसहस्रनाम की उत्तरपीठि का में ललितासहस्रनाम की दिव्य महिमा की चर्चा करते हुए बताया गया
है कि विष्णु के सहस्रनाम से शिव का एक नाम उत्तम है और शिव के सहस्रनाम से भी बढ़कर है देवी
ललिता के एक नाम का उच्चारण । इससे शक्ति की सर्वश्रेष्ठता और माहात्म्य समझा जा सकता है –

बिष्णुनामसहस्राच्च नामैकं शैवमुत्तमम् ।
शिवनामसहस्रा देव्या नामैकमुत्तमम् ।।

कभी ऐसा अर्थ ग्रहण नही करना चाहिए कि हम विष्णु या शिव के सहस्रनाम की महिमा घटाकर बता रहें
हैं । शक्तितत्त्व की परमोच्चता के निरूपण की दृष्टि से अगस्त्य के प्रति भगवान हयग्रीव के वचन की ओर
हम ध्यान आकृष्ट कर रहे हैं ।
हमारे ऋषि – मुनियों ने प्राचीन काल से मन्त्रों के जप का जो विधान रखा है उसमें हम देवी शक्ति को
अविस्मृत करने की परंपरा देखते हैं ।

शक्तिपीठों से जुड़े रहस्य को जानने के लिए यहां क्लिक करे शक्तिपीठों का प्रादुर्भाव

सहस्रनाम

प्रायः सभी देवों के मन्त्रों के ध्यान श्लोकों में शिव के स्वरूप का
निरूपण करने के बाद पार्वती का स्मरण किया जाता है , लेकिन कैसे ? इस रूप में –


शान्तं पद्मासनस्थं शशधरमुकुटं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रं
शूलं वज्रं च खड्गं परशुमभयदं दक्षभागे वहन्तम् ।
नागं पाशं च घण्टां प्रलयहुतवहं साङ्कुशं वामभागे
नानालङ्कारयुक्तं स्फटिकमणिनिभं पार्वतीशं नमामि ।।


शिवसहस्रनामपारायण के पूर्व यह पढ़ा जाना चाहिए –


कोटिसूर्यप्रकाशं त्रिनेत्रं चन्द्रभूषणम् ।
शूलं खड्गगदाशुभ्रकुन्तपाशधरं विभुम् ।।
वरदाभयहस्तं च सर्वाभरणभूषितम् ।
एवं ध्यात्वा अर्चयेद्देवं श्रद्धाभक्तिसमन्वितः ।।
पार्वतीसंहितं ध्यात्वा पूजयेत्परमेश्वरम् ।

विष्णुसहस्रणाम्परायण के अवसर पर पढ़े जाने वाले इस ध्यान श्लोक में भी शक्तितत्त्व का स्मरण किया
गया है –

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् ।
लक्ष्मीकांतं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ।।

(Visited 430 times, 1 visits today)

2 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *