शक्ति – सर्वस्वरूपिणी है

श्री यंत्र


Shree Yantra, Lakshmi yantra, Shri Chakra Mahayantra in Golden Paper

शिवशक्त्यात्मक श्रीचक्र में चार शिव के और पांच शक्ति के त्रिकोण हैं । जिनके रहस्य को जानकर
पंचदशी और षोडशी मन्त्रों द्वारा यथाविधि पूजा अर्चना करने वाला साधक श्रेयस्कर पथपर अग्रसर हो
सकता है । जिसके लिए गुरु की कृपा की निरन्तर आवश्यकता है ।

ब्रह्मांडपुराण में स्पष्ट ही बताया गया है
कि पंचदशी मन्त्र में शिव और शक्ति के बीजाक्षर है , जो साधक इनका रहस्य नही जानता , उसका प्रयास
व्यर्थ ही जाता है । –

कत्रयं हद्वयं चैव शैवो भागः प्रकीर्तितः ।
शक्त्यक्षराणि शेषाणि ह्नींकार उभयात्मकः ।।
एवं विभागमज्ञात्वा ये विद्याजपशालिनः ।
न तेषां सिध्दिदा विद्या कल्पकोटिशतैरपि ।।


त्रिपुरातापिन्युपनिषद् में ‘ तान् होवाच भगवान् श्रीचक्र व्याख्यास्याम इति ‘ इत्यादि विवरणद्वार श्रीचक्र के
सम्बंध में विषदरूप से कहा गया है । लोक में तथा आर्ष ग्रन्थों में शक्ति के सर्वव्यापक स्वरूप का निरूपण
विद्यमान है । शक्ति के बिना कुछ भी नही है , किसी भी वस्तु की कल्पना भी नहीं कि जा सकती ।

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