शक्तीपीठों रहस्य

शक्तीपीठ रहस्य


पौराणिक कथा है कि दक्ष के यज्ञ में शिव का निमन्त्रण न् होने से उनका अपमान जानकर सती ने उस देह
को योग बल से त्याग दिया और हिमालय की पुत्री पार्वती के रूप में शिव पत्नी होने का निश्चय किया । समाचार
विदित होने पर शिवजी को बड़ा क्षोभ और मोह हुआ । वे दक्षयज्ञ को नष्ट करके सती के शव को लेकर
घूमते रहे । सम्पूर्ण देवताओं ने या सर्वदेवमय विष्णु ने शिव के मोह की शांति एवं साधकों को सिद्धि
आदि के कल्याण के लिए शव के भिन्न भिन्न अंगों को भिन्न भिन्न स्थलों में गिरा दिया , वे ही ५१ पीठ हुए ।


ज्ञातव्य है कि योगिनिहृदय एवं ज्ञानार्णव के अनुसार ऊर्ध्वभाग के अंग जहां गिरे वहाँ वैदिक एवं
दक्षिणमार्ग की और हृदय से निम्र भाग के अंगों के पतनस्थलों में वाममार्ग की सिद्धि होती है । सती के
विभिन्न अंग कहाँ कहाँ गिरे और वहाँ कौन कौन से पीठ बने निम्नलिखित हैं ।

अंगों का पतन


१ – सती की योनि का जहाँ पात हुआ , वहीं कामरूप नामक शक्तीपीठ हुआ , वह ‘अ ‘ कारक उतपत्ति स्थान एवं
श्रीविद्या से अधिष्ठित है । यहाँ कौलशास्त्रानुसार अणिमादि सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं लोम से उतपन्न
इसके, वंश ,नामक दो पीठ है , जहाँ शाबर मंत्रों की सिद्धि होती है ।
२ – स्तनों के पतनस्थल में काशिका शक्तीपीठ हुआ और वहाँ से ‘ आ ‘ कार उत्पन्न हुआ । वहाँ देहत्याग करने से
मुक्ति प्राप्त होती है ।

सती के स्तनों से दो धाराएँ निकलीं , वे ही असी और वरणा नदी हुई । असी के तीर
पर ‘ दक्षिण सारनाथ ‘ एवं वरणा के उत्तर में ‘ उत्तर सारनाथ ‘ उपपीठ है । वहाँ क्रमशः दक्षिण एवं


उत्तरमार्ग के मन्त्रो की सिद्धि होती है ।

गुह्य भाग शक्तीपीठ

३ – गुह्यभाग जहाँ पतित हुआ वहाँ नेपाल शक्तीपीठ हुआ । वहाँ से ‘ इ ‘ कार की उतपत्ति हुई । वह पीठ वाममार्ग
का मूलस्थान है । वहाँ ५६ लाख भैरव – भैरवी , २ हजार शक्तियां , ३ सौ पीठ एवं १४ श्मशान सनिहित है ।
वहां चार पीठ दक्षिणमार्ग के सिद्धिदायक हैं ।

उनमें से भी चार में वैदिक मन्त्र सिद्ध होते हैं । नेपाल से
पूर्व में मल का पतन हुआ , अतः वहाँ किरातों का निवास है ।

वहाँ ३० हजार देवयोनियों का निवास है ।
४ – वामनेत्र का पतनस्थल रौद्र पर्वत है , वह महत शक्तीपीठ हुआ , वहाँ से ‘ ई ‘ कार की उतपत्ति हुई । वामाचार
से वहाँ मंत्रसिद्धि होकर देवता का दर्शन होता है ।
५- वामकर्ण के पतनस्थान में काशमीर शक्तीपीठहुआ , वह ‘ उ ‘ कारका उतप्तिस्थान हैं । वहाँ सर्वविध मन्त्रों
की सिद्धि होती है । वहाँ अनेक अद्भुत तीर्थ हैं । किंतु कलि में सब म्लेच्छों द्वारा आवृत कर दिए गए ।

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