शक्तीपीठों रहस्य

उपपीठ

१७ – जहाँ मस्तक का पतन हुआ , वहाँ श्रीपीठ हुआ तथा ‘ क ‘ कार का प्रादुर्भाव हुआ । कलि में पापी
जीवों का वहाँ पहुँचना दुर्लभ है । उसके पूर्व में कर्णा भरण के पतन से उपपीठ हुआ , जहाँ
ब्रह्मविद्याप्रकाशिका ब्राह्मिशक्ति का निवास है । उससे अग्निकोण में कर्णार्धाभरण के पतन से दूसरा
उपपीठ हुआ । जहाँ मुखशुद्धिकरी महेश्वरी शक्ति है ।

दक्षिण में पत्रवल्ली की पातभूमि में
कौमारीशक्तियुक्त तीसरा उपपीठ है । नैऋत्य में कण्ठमाल के निपातस्थल में एन्द्रजालविद्यासिद्धिप्रद
वैष्णवी शक्ति समन्वित चौथा उपपीठ हुआ ।

पश्चिम में नासामौक्तिक के पतनस्थान में
वारहिशक्त्याधिष्ठत पाँचवाँ उपपीठ हुआ । वायुकोण में मस्तकाभरण के पतनस्थान में चामुंडा
शक्तियुक्त क्षुद्रदेवतासिद्धिकर छठा उपपीठ हुआ ।

महालक्ष्मी शक्तीपीठ

और ईशान में केशाभरण के पतन से महालक्ष्मी
द्वारा अधिष्ठित सातवाँ उपपीठ हुआ ।


१८ – उसके ऊपर में कंचुकी की पतनभूमि में एक और पीठ हुआ , जो ज्योतिर्मन्त्रप्रकाशक एवं
ज्योतिष्मती द्वारा अधिष्ठित है । वहाँ ‘ ख ‘ कार का प्रादुर्भाव हुआ । वह पीठ नर्मदा द्वार अधिष्ठित है , वहाँ
तप करने वाले महर्षि जीवमुक्त हो गए ।
१९ – वक्षः स्थल के पतन स्थल में एक पीठ और ‘ ग ‘ कार की उत्तप्ति हुई । अग्नि ने वहाँ तपस्या की और
देवमुखत्व को प्राप्त होकर ज्वालामुखी संज्ञक उपपीठ में स्थित है ।
२० – वामस्कन्ध के पतनस्थान में मालवपीठ हुआ , वहाँ ‘ घ ‘ कार की उतपत्ति हुई । गन्धर्वों ने राग ज्ञान के
लिये तपस्या कर वहाँ सिद्धि पायी ।

दक्षिण कुक्षि शक्तीपीठ

२१ – दक्षिण कक्ष का जहाँ पात हुआ वहाँ कुलान्तक शक्तीपीठ हुआ ।और ‘ ङ ‘ कारका प्राकट्य हुआ ।
विद्वेषण , उच्चाटन , मारण के प्रयोग वहाँ सिद्ध होते हैं ।
२२ – जहाँ वामकक्ष का पतन हुआ , वहाँ कोट्टकपीठ हुआ और ‘ च ‘ कारका प्राकट्य हुआ । वहाँ राक्षसों ने
सिद्धि प्राप्त की है ।

२३ – जठरदेश के पतनस्थल में गोकर्ण शक्तीपीठ हुआ तथा ‘ छ ‘ कारकी उत्तप्ति हुई ।
२४ – त्रिवलियों में से जहाँ प्रथम वलि का निपात हुआ , वहाँ मातुरेश्वरीपीठ होकर ‘ ज ‘ कारकी उत्तप्ति
हुई , वहाँ शैवमन्त्र शीघ्र सिद्ध होते हैं ।

(Visited 87 times, 1 visits today)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *