शक्तीपीठों रहस्य

अपरवल्ली शक्तीपीठ

२५ – अपर वलि के पतनस्थल में अट्ठासपीठ हुआ तथा ‘ झ ‘ कारका प्रादुर्भाव हुआ , वहाँ गणेश मन्त्रों की
सिद्धि होती है ।
२६ – तीसरी वलि का जहाँ पतन हुआ वहाँ विरज शक्तीपीठ हुआ तथा ‘ ञ ‘कारकी उत्तप्ति हुई । यह पीठ
विष्णुमन्त्रों के लिए विशेष सिद्धिप्रदायक है ।
२७ – जहाँ वस्तिका पात हुआ , वहाँ राजगृह पीठ हुआ तथा ‘ ट ‘
कारकी उत्तप्ति हुई । नीचे क्षुद्रघण्टिका के पतनस्थल में घण्टिका नामक उपपीठ हुआ , वहाँ ऐंद्रजालिक
मन्त्र सिद्ध होते हैं । राजगृह में वेदार्थज्ञान की प्राप्ति होती है ।
२८ – नितम्ब के पतनस्थल में महापथपीठ हुआ तथा ‘ ठ ‘ कारकी उत्तप्ति हुई । जातिदुष्ट ब्राह्मणों ने वहाँ
शरीर अर्पित किया और दूसरे जन्म में कलियुग में देहसौख्यदायक वेदमार्गप्रलुम्पक अघोरादि मार्ग को
चलाया ।

२९ – जहाँ जघन का पात हुआ , वहाँ कोलगिरिपीठ हुआ और ‘ ड ‘ कारकी उत्तप्ति हुई । वहाँ वन देवताओं
के मन्त्रों की सिद्धि शीघ्र होती है ।
३० – दक्षिण उरु के पतनस्थल में एलापुरपीठ हुआ तथा ‘ ढ ‘ कारका प्रादुर्भाव हुआ ।

वाम ऊरु शक्तीपीठ

३१ – वाम उरु के पतनस्थान में महाकलेश्वर शक्तीपीठ हुआ तथा ‘ ण ‘ कारकी उत्तप्ति हुई । वहाँ
आयुर्वृद्धिकारक मृत्युञ्जयादि मन्त्र सिद्ध होते हैं ।

३२ – दक्षिणजानु के पतनस्थान में जयन्ति शक्तीपीठ हुआ तथा ‘ त् ‘ कारकी उत्तप्ति हुई । वहाँ धनुर्वेद की
सिद्धि अवश्य होती है ।

३३ – वामजानु जहाँ पत्तित हुआ , वहाँ उज्जयिनी शक्तीपीठ हुआ तथा ‘ थ ‘ कार प्रकट हुआ , वहाँ कवचमन्त्रों
की सिद्धि होकर रक्षण होता है । अतः उसका नाम अवन्ती है ।

३४ – दक्षिणजंघा के पतनस्थान में योगिनिपीठ हुआ तथा ‘ द ‘ कार प्रकट हुआ । वहाँ कौलिक मन्त्रों की
सिद्धि होती है ।

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