शक्तीपीठों रहस्य

वाम जंघा शक्तीपीठ

३५ – वामजंघा की पतनभूमि पर क्षीरकापीठ हुआ तथा ध कार प्रकट हुआ । वहाँ वैतालिक एवं शाबर
मंत्र सिद्ध होते हैं ।

३६ – दक्षिणगुल्फ़ के पतनस्थान में हस्तिनापुरपीठ हुआ तथा ‘ न ‘ कारकी उत्तप्ति हुई वहीँ नूपुर का पतन
होने से नुपुरार्णवसंज्ञक उपपीठ हुआ , वहाँ सूर्यमंत्रो की सिद्धि होती है ।

३७ – वामगुलफ के पतन स्थल में उड्डीष्पीठ हुआ तथा ‘ प ‘ कार का प्रादुर्भाव हुआ । उड्डीशाख्य महातन्त्र
वहाँ सिद्ध होता है । जहाँ दूसरे नूपुर का पतन हुआ , वहाँ डामर उपपीठ हुआ ।

देहरस शक्तीपीठ


३८ – देहरस के पतनस्थान में प्रयागपीठ हुआ तथा ‘ फ़ ‘ कार प्रकट हुआ । वहाँ की मृतिका श्वेतवर्ण की
दृष्टिगोचर होती है ।

वहाँ अन्यान्य अस्थियों का पतन होने से अनेक उपपीठों का प्रादुर्भाव हुआ । गङ्गां
कि पूर्व में बगला उपपीठ एवं उत्तर में चामुण्डादि उपपीठ , गङ्गां यमुना के मध्य राजराजेश्वरी संज्ञक
तथा यमुना के दक्षिण तटपर भुवनेशी नामक उपपीठ हुए । इसलिए प्रयाग को तीर्थराज एवं पीठराज
कहा गया है ।
३९ – दक्षिणपृषणी के पतन स्थल में षष्ठीषपीठ हुआ एवं वहाँ ‘ ब ‘ कार का प्रकट हुआ । यहाँ पदुकामन्त्र
की सिद्धि होती है ।

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