शक्तीपीठों रहस्य

वाम पृष्णि शक्तीपीठ

४० – वामपृष्णि जहाँ पात हुआ , वहाँ मायपुरपीठ हुआ तथा ‘ भ ‘ कारकी उत्तप्ति हुई । वहाँ समस्त
मायाओं की सिद्धि होती है ।
४१ – रक्त के पतनस्थान में मलयपीठ हुआ एवं ‘ म् ‘ कार की उत्तप्ति हुई । रक्ताम्बरादिक बौद्धों के मन्त्र
यहाँ सिद्ध होते हैं ।

४२ – पित्त की पतनभूमि पर श्रीशैलपीठ हुआ तथा ‘ य ‘ कारका प्रादर्भाव हुआ । विशेषतः वैष्णवमन्त्र यहाँ
सिद्ध होते हैं ।

४३ – मेद के पतनस्थान में हिमालय पर मेरुपीठ हुआ एवं ‘ र ‘ कारकी उत्तप्ति हुई । यहाँ स्वर्णाकर्षण भैरव
की सिद्धि होती है ।

४४ – जहाँ जिह्वाग्र का पतन हुआ , वहाँ गिरिपीठ हुआ तथा ‘ ल ‘ कारकी उत्तप्ति हुई । जहाँ जप करने से
वाकसिद्धि होती है ।

मज्जा शक्तीपीठ

४५ – मज्जा के पतनस्थान में माहेन्द्र पीठ हुआ , वह ‘ व ‘ कारका प्रादर्भाव हुआ । यहाँ शाक्तमन्त्रों के जप
से सिद्धि अवश्य होती है ।
४६ – दक्षिणांगुष्ठ के पातस्थल में वामनपीठ हुआ एवं ‘ श ‘ कारकी उत्तप्ति हुई । यहाँ समस्त मन्त्रों की
सिद्धि होती है ।
४७ – वामांगुष्ठ के निपतनस्थल में हिरण्यपुरपीठ हुआ तथा ‘ ष ‘ कार का प्रादुर्भाव हुआ । वहाँ वाममार्ग से
सिद्धिलाभ होता है ।
४८ – रुचि के पतनस्थान में महालक्ष्मी पीठ हुआ एवं ‘ स ‘ कारका प्राकट्य हुआ । यहाँ सर्वसिद्धियाँ
प्राप्त होती हैं ।
४९ – धमनी के पतनस्थल में अत्रि पीठ हुआ तथा ‘ ह ‘ कारकी उत्तप्ति हुई ।

वहाँ यावत सिद्धियाँ प्राप्त
होती हैं ।
५० – छाया के सम्पातस्थान में छायापीठ हुआ एवं ‘ ‘ उत्तप्ति हुई ।
५१ – केशपाश के पतनस्थल में क्षत्रपीठ का प्रादर्भाव हुआ , यहीं क्ष , कारका प्रादुर्भाव हुआ । यहाँ समस्त
सिद्धियाँ शीघ्रतापूर्वक उपलब्ध होती हैं ।

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