शिव ध्यान

देवो के देव महादेव जितने भोले है उतनी ही उनकी लीलाओ का वर्णन है,भगवान आशुतोष के नाम से जाने, वाले महादेव अपने भक्तों की गलतियों पर भी संतुष्ट हो जाते हैं! महादेव की शरण भला कौन नहीं जाना चाहता ,इस घोर कलिकाल में भगवान महादेव ही सबकी नय्या वाले है !उन महदेव भगवान को प्रशन्न करना बहुत ही आसान है !जो भक्त श्रद्धा पूजा अर्चना करता है ,वह मनोकामनाओं की पूर्ति भी शीघ्र ही प्राप्त क्र लेता है! तो आईये जानते है शिवजी के उन ध्यान भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है !

शिव ध्यान मंत्र

सजल घनसमाभं भीम दंष्ट्रं त्रिनेत्रं

भुजगधरघोरं ह्यरक्त वस्त्राङ्ग रागाम् ।

परशु डमरू खड्गान् खेटकं वाण चापौ

त्रिशिखि नर कपाले विभ्रतं भावयामि ।।

शिव गायत्री

ऊँ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि

तन्नो रुद्रः प्रचोदयात ।

स्तुति

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम् ।

सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि ।।

ध्येयः पङ्चमुखो रुद्रः

स्फटिकामलकान्तिमान् ।

विद्युच्छुभ्रासितरजःश्यामान्यस्यमुखानितु

जटावबध्देन्दुकलः प्रियायुङ्नागभूषणः।।

पद्मासिनं समन्तात् स्तुतममरगणैव्याध्र कृतिं वसान् ।

विश्ववाद्यं विश्वबीजं निखिलभयहरं पन्चवक्रं त्रिनेत्रम् ।।

वन्धूक सन्निभं देवं त्रिनेत्रं चन्द्र शेखरम् ।

त्रिशूल धारिणं देवं चारूहासं सुनिर्मलम् ।।

कपाल धारिणं देवं वरदाभय हस्तकम् ।

उमया सहितं शम्भूं ध्यायेत् सोमेश्वरं सदा ।।

शम्भो ध्यान

शिव ध्यान मंत्र

करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसंवापराधं ।

विहितं विहितं वा सर्व मेतत् क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो ।।

ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचन्द्रावतंसं

रत्नाकल्पोज्ज्वलाङ्गं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम् ।

पद्मासीनं समन्तात् स्तुतममरगणैर्व्याध्रकृत्तिं वसानं

विश्ववाद्यं विश्वबीजं निखिलभयहरं पन्चवक्त्रं त्रिनेत्रम् ।।

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