सिद्ध पीठों का वर्णन


हिमाचल प्रदेश का ज्वालामुखी शक्तिपीठ


पठानकोट – योगिन्दरनगर रेलमार्ग पर स्थित ज्वालामुखी रोड स्टेशन से लगभग २१ किलोमीटर दूर
कांगड़ा जिले में कालीधर पर्वत की सुरम्य तलहटी में ज्वालामुखी शक्तिपीठ है । यहाँ देवी देह की जिह्वा
का पतन हुआ था । यहाँ की शक्ति सिद्धिदा ‘ ओर भैरव ” उन्मत्त ” है । मन्दिर के अहाते में छोटी नदी के
पुलपर से जाना होता है ।

मन्दिर के भीतर पृथ्वी में से मशाल जैसी ज्योति निकलती है , शिवपुराण तथा
देवीभागवत के अनुसार इसी को देवी का जवालारूप मन गया है । यहाँ मन्दिर के पीछे की दीवार के
गोखले से ४ कोने में से १ , दाहिनी ओर की दीवार से १ और मध्य कुंड की भित्तियों से ४- इस प्रकार दस
प्रकाश निकलते हैं जिनके अतिरिक्त और भी कई प्रकाश मन्दिर कु भित्ति के पिछले भाग से निकलते है
। इनमे से कई स्वतः बुझते ओर प्रकाशित होते रहते हैं ।

ये ज्योतियां अनादिकाल से जल रही है । ज्योतियों
को दूध पिलाया जाता है तो उसमें बाती तैरने लगती है । और कुछ देर नाचती है । यह दृश्य हृदय को
बरबस आकृष्ट कर लेता है । ज्योतियों की संख्या अधिक से अधिक तरह और कम से कम तीन होती है ।

देवीमन्दिर के पीछे एक छोटे मन्दिर में कुआँ है । उसकी दीवार से दो प्रकाशपुंज निकलते हैं । पास में
दूसरे कुएँ में जल है । उसे लोग गोरखनाथ की डिभी कहते है आस पास काली देवी के तथा अन्य कई
मंदिर है । मन्दिर के सामने जल का कुंड है उससे जल बाहर निकालकर स्नान किया जाता है । नवरात्र में
यहाँ बड़ा मेला लगता है ।

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