सिद्ध पीठों का वर्णन

नेपाल गुह्येश्वरी शक्तिपीठ


नेपाल में पशुपतिनाथ मंदिर से थोड़ी दूर पर बागमती नदी पड़ती है । नदी के उस पार भगवती गुह्येश्वरी
का सिद्ध शक्तिपीठ है । ये नेपाल की अधिष्ठात्री देवी है ।

सारा नेपाल इन गुह्यकालिका देवी की अनन्य
भक्ति से वन्दना करता है । नवरात्र में नेपाल के महाराज बागमती में सन्नानकर सपरिवार भगवती के दर्शन
करने जाते हैं । यहाँ का मंदिर विशाल एवं भव्य है ।

, मन्दिर में एक छिद्र है । जिसमें से निरन्तर जल
प्रवाहित होता रहता है । यह मंदिर ही शक्तिपीठ है । यहाँ देवीदेह के दोनों जानु ( घुटने ) गिरे थे । यहाँ की
शक्ति ” महामाया ” और भैरव ” कपाल ” हैं ।

पाकिस्तान का हिंगुला शक्तिपीठ


यह शक्तिपीठ पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के हिंगलाज नामक स्थान में है । हिंगलाज कराँची से
१४४ किलोमीटर दूर उत्तर पश्चिम दिशा में हिंगोस नदी के तट पर है । कराँची से फारस की खाड़ी की
ओर जाते हुए मकरान तक जलमार्ग तथा आगे पैदल जाने पर ७वें मुक़ामपर चन्द्रकूप है ।

यह आग
उगलता हुआ सरोवर है । इस यात्रा का अधिकांश भाग मरुस्थल से होकर तय करना पड़ता है । जो अत्यंत
दुष्कर होता है । चन्द्रकूप पर प्रत्येक यात्री को प्रच्छन पापों को जोर जोर से कहकर उनके लिए क्षमा
मांगनी पड़ती है । और आगे न् करने की शपथ लेनी होती है । आगे १३वें मुकाम पर हिंगलाज है । यहीं एक
गुफा के अंदर जाने पर हिंगलाजदेवी का स्थान है । जहाँ शक्तिरूप ज्योति के दर्शन होते हैं । गुफा में हाथ
पैर के बल जाना होता है । यहाँ देवीदेह का ब्रह्मरन्ध्र गिरा था । यहाँ की शक्ति ” कोट्टरी ” और भैरव “
भीमलोचन ” हैं ।

कथा


पुराणों में हिंगुलापीठ की बड़ी महिमा बतायी गयी है । श्रीमद्देवीभगवतमहापुरण में वर्णन आया है । कि
हिमालय के पूछने पर देवी ने अपने प्रिय स्थानों को बताया उसमे हिंगुला को महस्थान कहा गया है । “
हिंगुलाया महस्थानम ” । इसी प्रकार ब्रह्मववैवर्तपुरण में कहा गया है कि आश्विन मास में शुक्लपक्ष की
अष्टमी को हिंगुला में श्रीदुर्गा जी की प्रतिमा का दर्शन , पूजन कर उपवास करने से पुनर्जन्म के कष्ट का
निवारण हो जाता है ।

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