सिद्ध पीठों का वर्णन

नलहटी


यह शक्तिपीठ बोलपुर शांतिनिकेतन से ७५ कि० मी० तथा सैंथिया जंक्शन मात्र ४२ कि० मी० दूर
नलहटी रेलवे स्टेशन से ३ कि० मी० की दूरी पर नैऋत्यकोण में स्थित एक ऊंचे टीले पर है । यहाँ देविदेह
की उदरनली का पतन हुआ था । कुछ लोगों की मान्यता है कि यहाँ शिरोनली का पतन हुआ था । यहाँ सिद्ध पीठ
की शक्ति ‘कालिका ‘ और भैरव योगीश है ।

नन्दीपुर


सिद्ध पीठ पूर्वी रेलवे की हावड़ा क्युल लाइन में सैंथिया स्टेशन से अग्रिकोंण में थोड़ी दूर पर नन्दीपुर नामक स्थान में
एक बड़े वटवृक्ष के नीचे देवीमन्दिर है । यह ५१ शक्तिपीठों में से एक है । यहाँ देविदेह से कण्ठहार गिरा था
। यहाँ की शक्ति ‘ नंदिनी ‘ और भैरव नंदिकेश्वर है ।

अट्टहास

यहसिद्ध पीठ वर्धमान से १३ कि० मी० दूर कटवा अहमदपुर लाइन पर लाबपुर स्टेशन के निकट है ।यहाँ
देविदेह का अधरोष्ठ गिरा था । यहाँ की शक्ति फुल्लरा और भैरव विश्वेश है ।

किरीट


यह सिद्ध पीठ हावड़ा बरहरवा रेलवे लाइन पर हावड़ा से ढाई किलोमीटर दूर लालबाग कोट स्टेशन से
लगभग ५ किलोमीटर पर बड़नगर के पास गंगातट पर स्थित है । यहाँ देविदेह से किरीट नामक शिरोभुवन
गिरा था । यहाँ की शक्ति ‘ विमला ‘ भुवनेशी ‘ और भैरव संवत है ।

यशोर


यह सिद्ध पीठ बृहत्तर भारत के बंगप्रदेश में और वर्तमान में बंगलादेश में स्थित है । यह खुलना जिले के
जैशोर शहर में है । यहाँ देविदेह की वाम हथेली गिरी थी । यहाँ की शक्ति यशोरेश्वरी और भैरव चन्द्र है ।


चट्टल


यह सिद्ध पीठ भी बांगलादेश में है । यह चटगावँ से ३८ किलोमीटर दूर सीताकुण्ड स्टेशन के पास
चन्द्रशेखरपर्वत पर भवानीमन्दिर के रूप में स्थित है । चन्द्रशेखर शिव का भी यहाँ मन्दिर है । जो समुद्र की
सतह से लगभग ३५० मीटर की ऊंचाई पर स्थित है ।

यहाँ निकट सीताकुण्ड व्यासकुण्ड ,सूर्यकुंड , ब्रह्मकुंड
, जनकोटिशिव , सहस्रधारा , बाडवकुण्ड , तथा लवनाक्षतीर्थ है । बाडवकुण्ड में से निरन्तर आग निकला
करती है । शिवरात्रि को यहाँ मेला लगता है । यहाँ देविदेह कु दक्षिण बाहू गिरी थी । यहाँ की शक्ति भवानीं
और भैरव चन्द्रशेखर है ।

करतोयातट


सिद्ध पीठ वर्तमान में यह शक्तिपीठ भी बंगलादेश में ही है । यह लालमणिराहट – सन्तहाट रेलवे लाइन पर बोंगड़ा
स्टेशन से दक्षिण , पश्चिम में ३२ किलोमीटर दूर भवानीपुर गाँव में स्थित है । यहाँ देविदेह का बायाँ तल्प
गिरा था । यहाँ की शक्ति अपर्णा और भैरव वामन है ।

विभाष

यह सिद्ध पीठ पश्चिम बंगाल में मिदनापुर जिले में ताम्रलुक में है , वहाँ रूपनारायण नदी के तट पर
वर्गभीमा का विशाल मंदिर ही यह शक्तिपीठ है । मन्दिर अत्यंत प्राचीन है । दक्षिण पूर्व रेलवे के पास कूड़ा
स्टेशन से २४ किलोमीटर की दूरी पर यह स्थान है । यहाँ सीता का बायाँ टखना ( एड़ी के ऊपर की हड्डी )
गिरी थी । यहाँ की शक्ति कपालिनी भीमरूपा तथा भैरव सर्वानंद है ।

सुगन्धा


यहसिद्ध पीठ भी वर्तमान में बंगलादेश में है । वहाँ पहुँचने के लिए खुलना से बारिसालतक स्टीमर से
जाया जाता है । बारीसाल से २१ किलोमीटर उत्तर में शिकारपुर ग्राम में सुगन्धा नदी के तट पर उग्रतारा
देवी का मंदिर है , यह ५१ शक्तिपीठों में से एक है । यहाँ देविदेह की नासिका गिरी थी । यहाँ की शक्ति ‘
सुनंदा ‘ और भैरव त्र्यम्बक ‘ है ।

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