सिद्ध पीठों का वर्णन

पुण्य

जो मनुष्य परम् भक्तिपूर्वक देवी हरसिद्धि का
दर्शन करता है , वह अक्षय भोग प्राप्त कर मृत्यु के पश्चात शिवधाम को जाता है ।
हरसिद्धिदेवी का एक मंदिर द्वारका ( सौराष्ट्र ) में भी है । दोनों स्थानों पर देवी की मूर्तियाँ एक जैसी हैं ।
एक किवंदन्ती के अनुसार महाराजा विक्रमादित्य वहीं से देवी को अपनी आराधना से संतुष्ट कर लाये थे
। मुस्लिम – आक्रमणकारियों ने इस मंदिर को नष्ट भ्रष्ट कर दिया था । राणोजी शिंदे के मंत्री रामचंद्रबाबा
शेणवी ने इसका पुनर्निर्माण कराया । ये देवी वैष्णवो है ।

शोण


सिद्ध पीठ अमरकण्टक के नर्मदमन्दिर में यह शक्तिपीठ माना जाता है एक अन्य मान्यता के अनुसार विहार प्रदेश
के सासारामस्थित ताराचण्डी मन्दिर को शक्तिपीठ माना जाता है । यहाँ देवीदेह का दक्षिण नितम्ब गिरा
था यहाँ की शक्ति नर्मदा या शोणाक्षी और भैरव भद्रसेन है कुछ विद्वान् डेहरी सोन स्टेशन से कुछ दूर
स्थित देविस्थान को यह शक्तिपीठ मानते हैं ।

तमिलनाडु के शक्तिपीठ


सिद्ध पीठ भारत का दक्षिणस्थ तमिलनाडु प्रदेश प्राचीनतम द्रविड़ सभ्यता का केंद्र है । देवी पूजा की यहाँ अति
प्राचीन परंपरा रही है । यहाँ की वरलक्ष्मी वरदम और नवरात्र उत्सव देवी के महालक्ष्मीं ,महासरस्वती और
दुर्गा – तीनों रूपों की प्रसन्नता के लिए मनाये जाते हैं । साक्षात् जगजनन्नी भगवती पार्वती ने अपने अंश से
मिनाक्षीरूप में अवतार लेकर इस भूभाग को पावन किया है । इस प्रदेश में भगवती जगदम्बा के ४
शक्तिपीठ है । इनका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है –

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