सिद्ध पीठों का वर्णन

शुचि

सिद्ध पीठ तमिलनाडु में तीन महासागरों के संगमस्थल कन्याकुमारी से १३ किलोमीटर दूर शुचिन्द्रम में स्थाणु शिव
का मंदिर है । उसी मन्दिर में यह शक्तिपीठ स्थित है कन्याकुमारी एक अंतरीप है यह भारत की अंतिम
दक्षिण सीमा है यहाँ देवीदेह ह ऊर्ध्व दन्त गिरे थे । यहाँ की शक्ति ,नारायणी, और भैरव ‘ संहार ‘ या ‘ संकूर
‘ है ।

रत्नावली


यह सिद्ध पीठ मद्रास के पास है परंतु स्थान अज्ञात है । यहाँ देवीदेह का दक्षिण स्कंध गिरा था । यहाँ की
शक्ति ‘कुमारी ‘ और भैरव ‘ शिव ‘ है ।


कनयकाश्रम या कण्यकाचक्र

सिद्ध पीठ तमिलनाडु में तीन सागरों के संगमस्थल पर कन्याकुमारी का मंदिर है । उस मंदिर में ही भद्रकालिका भी
मन्दिर है । ये कुमारी देवी की सखी है ,उनका मन्दिर ही शक्तिपीठ है । यहाँ देविदेह का पृष्ठ भाग गिरा था ।
यहाँ की शक्ति ‘शर्वाणि ‘ और भैरव ‘ निमिष ‘ हैं ।


काञ्ची


सिद्ध पीठ तमिलनाडु में कांजीवरम स्टेशन के पास ही शिवकाँची नामक एक बड़ा नगरभाग है । वहाँ भगवान
एकाम्रेश्वर शिव का मंदिर है । यहाँ से स्टेशन की ओर लगभग दो फलाँग की दूरी पर कामाक्षीदेवी का
विशाल मंदिर है । मुख्य मंदिर में भगवती त्रिपुरसुन्दरी की प्रतिमूर्ति कामाक्षादेवी की प्रतिमा है । अन्नपूर्णा
शारदा माता तथा आद्याशंकराचार्य की मूर्तियां हैं । इस मंदिर को दक्षिण भारत का सर्वप्रधानशक्तिपीठ
माना जाता है । यहाँ देविदेह का कंकाल गिरा था । यहाँ की शक्ति ‘ देवगर्भा ‘ और भैरव रुरु हैं ।

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