सिद्ध पीठों का वर्णन


बिहार के शक्तिपीठ


बिहार में देवी पूजन की परंपरा लोकजीवन में समाहित है । भगवती षष्ठी ,चण्डी , बूढ़ी माई आदि विभिन्न
रूपों में यहाँ देवी उपासना प्रचलित है ।यहाँ का मिथिला अञ्चल तो साक्षात् जगजनन्नी जनकनंदिनी देवी
सीता जी का आविर्भाव स्थल ही रहा है । यह शक्ति उपासना के वैष्णव और तांत्रिक दोनों रूपों का
केन्द्रस्थल है इस प्रदेश में देवी देह के अंगों से निर्मित ३ शक्तिपीठ है । इनका संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है –


मिथिला


इस शक्तिपीठ का निश्चित स्थान अज्ञात है । मिथिला में कई ऐसे देवी मंदिर है , जिन्हें लोग सिद्ध पीठ शक्तिपीठ
बताते है । इनमें से एक जनकपुर नेपाल से ५१ किलोमीटर दूर पूर्वदिशा में उच्चेठ नामक स्थान पर वनदुर्गा
का मंदिर है । दूसरा सहरसा स्टेशन के पास उग्रतारा का मंदिर है । तीसरा समस्तीपुर से पूर्व ६१
किलोमीटर दूर सलौना रेलवे स्टेशन से ९ किलोमीटर दूर जयमनग्लादेवी का मंदिर है उक्त तीनों मन्दिर


विद्वज्जनों शक्तिपीठ माने जाते हैं । यहाँ देवी देह का वाम स्कंध गिरा था । यहाँ की शक्ति ‘उमा ‘ या
महादेवी और भैरव ‘महोदर ‘ है । परंतु उग्रतारा मन्दिर के विषय में मान्यता है । कि वहाँ देवी भगवती का
नेत्र पतन हुआ था । यहाँ एक यन्त्रपर तारा , जटा तथा नीलसरस्वती की मूर्तियाँ स्थित है ।


वैद्यनाथ


सिद्ध पीठ वैद्यनाथ धाम शिव और शक्ति के ऐक्य का प्रतीक है । यह बिहार राज्य में गिरिडीह जनपद में स्थित है ।
यहाँ भगवान शिव के द्वादशज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग तथा ५१ शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ

भी स्थित है । यह स्थान चिताभूमि में है । एक मान्यता के अनुसार शिव ने देविदेह का यहीं दाह संस्कार
किया था । यहाँ देविदेह का हृदय गिरा था । यहाँ की शक्ति ‘ जयदुर्गा ‘ और भैरव ‘ वैद्यनाथ ‘ है ।


मगध


सिद्ध पीठ बिहार की राजधानी पटना में स्थित पटनेश्वरी देवी के मंदिर की शक्तिपीठ के रूप में मान्यता है । यह
स्थान पटना सिटी चौक से लगभग ५ किलोमीटर पश्चिम महाराजगंज में है । यहाँ देवी देह की दक्षिण
जङघा का पतन हुआ था यहाँ की शक्ति, सर्वानन्दकरी , और भैरव व्योमकेश है ।
एक मान्यता के अनुसार मुंगेर में देवी देह के नेत्र का पतन हुआ था ।


उत्तरप्रदेश के शक्तिपीठ


सिद्ध पीठ पूर्णा प्रकृति की अंशस्वरूपा देवी गङ्गां और यमुना की पावन स्थली शक्तिस्वरूपा माँ विंध्यवासिनी की
निवासस्थली , प्रेममयी वृन्दावनाधीश्वरी श्रीराधारानी की लीलास्थली और अनन्त ब्रह्मांडो का भरण
पोषण करने वाली माँ अन्नपूर्णा की कृपास्थली उत्तरप्रदेश की धरती देवमयी है । यहाँ देवी के अनेक
मन्दिर विग्रह थान तथा यंत्रादि प्रतीक है । इस भूभाग में देवी के ३ दिव्य शक्तिपीठ है । इनका विवरण इस
प्रकार है ।

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