सिद्ध पीठों का वर्णन

गुजरात के शक्तिपीठ

अन्य प्रदेशों की भांति गुजरात प्रदेश भी शक्ति साधना एवं उपासना का केंद्र है । यहाँ आशापुर ,
अभ्यमाता, सुंदरी, बुटामाता , अनसूया तथा खोडियार माता आदि अनेक रूपों में देवी की पूजा होती है ।
यहाँ देवी के अनेक प्राचीन मंदिर हैं । इस प्रदेश में देविदेह के अंगों से निर्मित २ शक्तिपीठ है इनका
विवरण इस प्रकार है ।


प्रभास


गुजरात के गिरनार पर्वत के प्रथम शिखर पर देवी अम्बिका का विशाल मंदिर है । एक मान्यता के
अनुसार स्वयं जगजननी देवी पार्वती हिमालय से आकर यहाँ निवास करती हैं । इस प्रदेश के ब्राह्मण
विवाह के बाद वर , बधू को यहाँ देवी का चरण स्पर्श करवाने लाते हैं अम्बिका के इस मंदिर को ही


शक्तिपीठ माना जाता है । यहाँ देवीदेह का उदरभाग गिरा था । यहाँ की शक्ति ‘ चन्द्रभागा ‘ और भैरव ‘
वक्रतुण्ड ‘ हैं ।
एक मान्यता के अनुसार गुजरात के अर्बुदारण्यक्षेत्र में पर्वतशिखर पर सती के हृदय का एक भाग गिरा
था , उसी अंग की पूजा यहाँ आरासुरी अम्बिका जी के नाम से होती है । यहाँ माता जी का श्रृंगार प्रातः
बालरूप में मध्याह्न युवतीरूप में तथा सायं वृद्धरूप में होता है । माता के विग्रह स्थान पर बिसायन्त्र मात्र है
। यह भी प्रसिद्ध है । कि गिरनार के निकट भैरवपर्वत पर सती का ऊर्ध्व ओष्ठ गिरा था जो भैरव
शक्तिपीठ के नाम से विख्यात है ।

आंध्रप्रदेश के शक्तिपीठ


आंध्रप्रदेश देवस्थानों के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है । यहाँ शिव , विष्णु , गणेश , कार्तिकेय आदि
देवताओं की उपासना होती है । देवी के भी मंदिरों और पीठों की यहाँ कमी नही हैं ५१ शक्तिपीठों में से २
इसी प्रदेश में अवस्थित है । इनका संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है ।

गोदावरी तट


आंध्रप्रदेश के गोदावरी स्टेशन के पास गोदावरी के पार कब्बूर में कोटितीर्थ है । यह शक्तिपीठ वहीं स्थित
है । यहाँ देवी देह जा बायाँ कपोल गिरा था । यहाँ की शक्ति विश्वेशी या रुक्मणि। और भैरव ‘
दण्डपाणि हैं

श्रीशैल


श्रीशैल में भगवान शंकर का मल्लिकार्जुन नामक ज्योतिर्लिंग है । वहाँ से लगभग ४ किलोमिटर पश्चिम
में भगवती भरमराम्बादेवी का मंदिर है । यह मंदिर ही शक्तिपीठ है , यहाँ देवीदेह की ग्रीवा का पतन हुआ
था । यहाँ की शक्ति महालक्ष्मी , और भैरव ‘ सवरानन्द’ या ‘ ईश्वरानंद ‘ है ।


महाराष्ट्र के शक्तिपीठ


महाराष्ट्र में भगवत पूजा का स्वरूप मुख्यता देविपरक ही है । तुलजाभवनी इस प्रदेश की कुलदेवी है ।
मुम्बादेवी के नाम पर इस प्रदेश की राजधानी का नाम मुम्बई है । भगवती जगजननी जगदम्बा देवी
महालक्ष्मी का नित्य निवास स्थल कोल्हापुर भी इसी राज्य में हैं । कालबादेवी , अम्बाजोगाई, रखुमाई
,रेणुकादेवी , शांतादुर्गा , लपराई देवी , आदि अनेक रूपों में यहाँ देवी की पूजा होती है । इस प्रदेश में २
शक्तिपीठ है इनका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है ।

करवीर


वर्तमान कोल्हापुर ही पुराण प्रसिद्ध करवीर क्षेत्र है । यहाँ पुराने राजमहल के पास खजानाघर हैं । उसके
पीछे महालक्ष्मी का विशाल मंदिर है । इसे लोग अम्बाजी का मंदिर भी कहते हैं ।इस मंदिर के घेरे में
महालक्ष्मी का निज – मन्दिर है । मन्दिर का प्रधान भाग नीले पत्थरों से बना है । इसके पास में ही


पद्मसरोवर ,काशीतीर्थ और मणिकर्णिकातीर्थ है । यहाँ काशीविश्वनाथ ,जगनन्नाथ जी आदि देवमन्दिर है
। यहाँ का महालक्ष्मी मंदिर ही शक्तिपीठ माना जाता है । देवीदेह के तीनों नेत्र यहाँ गिरे थे । यहाँ की
शक्ति , महिषामर्दिनी और भैरव क्रोधीश हैं । यहाँ भगवती महालक्ष्मी का नित्य निवास माना गया है ।
स्कंधपुराण में इनकी महिमा का इस प्रकार वर्णन है —

प्रमाणं

योजनं दश हे पुत्र काराष्टो देशदुर्धरः ।।
तन्मध्ये पन्चकोशन्च काश्याद्यादधिकं भुवि ।
क्षेत्रं वै करवीराख्यं क्षेत्रं लक्ष्मीविनिर्मितम् ।।
तत्क्षेत्रं हि महत्पुण्यं दर्शनात् पापनाशनम् ।
तत्क्षेत्रे ऋषयः सर्वे ब्राह्मणा वेदपारगः ।।
तेषां दर्शनमात्रेण सर्वपापक्षयो भवेत् ।

भावार्थ

अर्थात् पुत्र । कराष्टदेश का विस्तार दस योजन है । यह देश दुर्गम है । उसी के बीच काशी आदि से भी
अधिक पवित्र श्रीलक्ष्मीनिर्मित पाँच कोस का करवीरक्षेत्र है । यह क्षेत्र बड़ा ही पुण्यमय तथा दर्शनमात्र से
पापों का नाश करने वाला है । इस क्षेत्र में वेदपारगामी ब्राह्मण तथा ऋषिगण निवास करते हैं । उनके
दर्शनमात्र से सारे पापों का क्षय हो जाता है ।


जनस्थान नासिक के पास पंचवटी में स्थित भद्रकाली के मंदिर की शक्तिपीठ के रूप में मान्यता है । इस
मंदिर में शिखर नही है । सिहांसन पर नवदुर्गाओं की मूर्तियाँ है , उनके मध्य में भद्रकाली की ऊंची मूर्ति है ,
यहाँ देविदेह की ठुड्डी गिरी थी । यहाँ की शक्ति ‘ भ्रामरी ‘ और भैरव ‘ विकृताक्ष ‘ है ।
मध्य रेलवे की मुम्बई से दिल्ली जाने वाली मुख्य लाइन पर नासिक रॉड प्रसिद्ध स्टेशन है , वहाँ से
पंचवटी ८ किलोमीटर दूर है ।

कश्मीर के शक्तिपीठ


हिमालय का पवित्र प्रांत , प्रकृति का मनोरम लीला स्थल कश्मीर , माँ वैष्णवदेवी का निवास स्थल है ।
रुद्रयामलतन्त्र में इसे शैवीमुखमिहोच्यते ” शक्ति और शिव के साक्षत्कार का प्रवेशद्वार कहा गया है । इसी
हिमालय की गोद में जगजननी भगवतीं जगदम्बा देवी पार्वती के रूप में अवतीर्ण हुई , अतः इसकी महिमा
का वर्णन भला कौन कर सकता है ! यहाँ देवी के २ शक्तिपीठ है जिनका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है ।

श्रीपर्वत


इस शक्तिपीठ के संदर्भ में दो मान्यताएं हैं । कुछ विद्वान् इसे लद्दाख कश्मीर में मानते है तो कुछ असम
प्रांत में सिलहट से ४ किलोमीटर दूर नैऋत्यकोण में जैनपुर नामक स्थान को शक्तिपीठ मानते हैं यहाँ
देवी देह का दक्षिण तल्प गिरा था । यहाँ की शक्ति ” श्रीसुन्दरी ” और भैरव ” सुंदरानंद ” हैं ।


कश्मीर


कश्मीर में अमरनाथ की गुफा में भगवान शिव के हिमज्योतिर्लिंग के दर्शन होते हैं वहीं हिमशक्तिपीठ भी
बनता है । एक गणेश पीठ और एक पार्वती पीठ भी हिम से बनता है । यह पार्वतीपीठ ही शक्तिपीठ है ।
श्रवण पूर्णिमा को अमरनाथ के दर्शन के साथ साथ यह शक्तिपीठ भी दिखाई देता है । यहाँ देवीदेह के

कण्ठ का पतन हुआ था । यहाँ देवी सती के अंग तथा अंगभूषण – कण्ठ प्रदेश की पूजा होती है । यहाँ की
शक्ति ” महामाया ” और भैरव ” त्रिसंध्येश्वर ” है ।


पंजाब का जालन्धर शक्तिपीठ


उत्तर रेलवे की मुगलसराय अमृतसर मुख्य लाइन पर पंजाब में जालन्धर रेलवे स्टेशन है , यह पंजाब के
मुख्य नगरों में से एक है एक किवंदती के अनुसार इसे जालन्धर नामक दैत्य की राजधानी माना जाता है ,
जिनका भगवान शंकर ने वध किया था ।
यहाँ विश्वमुखी देवी का मंदिर है । इस मंदिर में पीठस्थान पर स्तनमूर्ति कपड़े से ढकी रहती है और
धातुनिर्मित मुखमण्डल बाहर रहता है ।

इसे प्राचीन त्रिगर्त तीर्थ कहते हैं । यह मंदिर ही शक्तिपीठ है । यहाँ
देवी का वाम स्तन गिरा था ।

यहाँ की शक्ति ” त्रिपुरमालिनी ” ओर भैरव ” भीषण ” हैं ।


लोगों का विश्वास है कि इस पीठ में सम्पूर्ण देवी देवता और तीर्थ अंशरूप में निवास करते हैं यहाँ पशु के
भी मरने से उसे सदगति की प्राप्ति होती है और इसी कारण यहाँ व्यास , वसिष्ठ , मनु , जमदग्नि , परशुराम
आदि ऋषि महर्षियों ने देवी की उपासना की!

(Visited 364 times, 1 visits today)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *