सूर्य को अर्ध्य देने का महत्व

सूर्य को अर्ध्य देने का महत्व

सूर्य के बिना पृथ्वी पर जीवन सम्भव नही है सूर्य की किरणों से ही पृथ्वी पर प्रकाश आता है

यही प्रकाश
मनुष्य के जीवन से अंधकार को दूर करता है और हमारे धर्म में पाँच देवताओं की आराधना का विशेष
महत्व बताया गया है -गणेश, दुर्गा ,शिव ,विष्णु और सूर्य ।
इनमें सूर्य दैव् का विशेष महत्व है क्योंकि वही एक ऐसे देव हैं जिन्हें हम देख सकते है ।

सूर्य को अर्ध्य क्यों देते है कहा जाता है कि सूर्य को अर्ध्य देने से

सूर्य देव बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं ऐसा
भी कहा जाता है की सूर्य को अर्ध्य देते समय

सूर्य की किरणें जो जल से होकर हमारे शरीर पर पड़ती हैं
उससे हमारे शरीर को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा रहता है

सूर्य को अर्ध्य देने की विधि


सूर्योदय की प्रथम किरण के निकलते ही सूर्य को अर्ध्य देना सबसे उत्तम माना गया है ।
सर्वप्रथम प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व नित्य क्रिया से निवृत्त होकर स्न्नान करें ।
उसके बाद उगते हुए सूर्य के सामने आसन लगाएं ।

आसन पर खड़े होकर तांबे के पात्र में पवित्र जल लें
और रक्तचन्दन से युक्त लाल पुष्प चावल आदि तांबे के

पात्र में रखे हुए जल में डालें और सूर्य को अर्ध्य
दें ।

सूर्य को अर्ध्य देते समय तांबे के पात्र को दोनों हाथों से पकड़ कर इस तरह जल अर्पण करें,

कि सूर्य की
किरणें जल धारा से दिखाई दें ।
अर्ध्य देते समय इस बात का ध्यान रखें कि जिस जल से सूर्य को अर्ध्य दिया जा रहा है

वह पैरों से स्पर्श न हो ।

सम्भव हो तो एक पात्र रख लें जिससे वह जल उस पात्र में जमा हो जाये ।

और अर्ध्य देने के बाद उस जल को किसी पौधे में डाल दें ।

और इस बात का भी ध्यान रखें कि जो रास्ता आने जाने का हो भूलकर
भी ऐसे स्थान पर अर्ध्य नही देना चाहिए ।

सूर्य को अर्घ्य देने का मंत्र


अर्ध्य देते समय मन्त्र का जप अवश्य करें गायत्री मंत्र का जप भी कर सकते है या फिर

–ॐ सूर्याय नमः

ॐ एहि सूर्य सहस्रांशों तेजो राशे जगत्पते !

अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्ग्य नमोस्तुते !!

ॐ घृणि सूर्याय नमः

इत्यादि मंत्रो का जप कर सकते है
इसके बाद सीधे हाथ की अँजुरी में जल लेकर अपने चारों और जल छिड़के और पुनः उसी स्थान पर तीन
बार घूम कर परिक्रमा करें ततपश्चात भूमि स्पर्श करके सूर्य को प्रणाम करें ।

सूर्य का पौराणिक मन्त्र


जपा कुसुम संकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम ।
तमोरिं सर्वपापध्नं प्र्णतोअ्स्मि दिवाकरम् ।।

सूर्य गायत्री मंत्र –


ऊँ आदित्याय विदमहे प्रभाकराय धीर्माहतन्नः सूर्य प्रचोदयात् ।
ऊँ सप्ततुरंगाय विद्महे सहस्त्रकिरणाय धीमहि तन्नो रविः प्रचोदयात् ।।

वैज्ञानिक रहस्य

सूर्य को अर्घ्य देने का विधान प्रातः उठते ही देने का दिया हुआ है !जिसमें अगर मनुष्य अर्घ्य की धरा के बीच से सूर्य का दर्शन करता है तो उसके नेत्रों के रोग जैसे रतोंधी इत्यादि नष्ट हो जाते है!आँखों की रौशनी तीव्र हो जाती है साथ ही साथ प्रातः कल की किरणों से मनुष्य के शरीर पर चरम रोग से संबंधित सभी प्रकार के दोषों का भी नाश हो जाता है!

सूर्य अर्घ्य देते समय उससे पहले अगर १२ सूर्य नमस्कार भी किये जाये तो व्यक्ति सभी प्रकार के रोगों से बच जाता है और शतायु प्राप्त करता है !सामन्य भी देखा गया है जो लोग सूर्य नमस्कार और अर्घ्य दान प्रतिदिन करते है वे सभी प्रकार के रोगों से दूर रहते है!उनकी काया में दिव्य काँटी झलकती है लोगों के बिच उनका आकर्षण दिव्य ही चमकता है !तो जब सूर्य को अर्घ्य देने के इतने लाभ है तो फिर सूर्य अर्घ्य देने में क्या समस्या ?

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