शक्तिपीठों के प्रादुर्भाव की कथा

शक्तिपीठों के प्रादुर्भाव की कथा तथा उनका परिचय भूतभावन भवानीपति भगवान शंकर जिस प्रकार प्राणियों के कल्याणार्थ विभिन्न तीर्थों में पाषणलिंगरूप में आविर्भूत हुए हैं , उसी प्रकार अनन्तकोटि ब्रह्माण्डात्मक प्रपंच की अधिष्ठानभूता ,सच्चिदानन्दरूपा , करुणामयी , भगवती भी लीलापूर्वक विभिन्न तीर्थों में भक्तों पर कृपा करने हेतु पाषाणरूप से शक्तिपीठों के रूप में विरजमान है । ये शक्तिपीठ साधकों को सिद्धि और कल्याण प्रदान करने वाले हैं । इनके प्रादुर्भाव की कथा पुण्यप्रद तथा अत्यंत रोचक है ! —

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सूर्य को अर्ध्य देने का महत्व

सूर्य को अर्ध्य देने का महत्व सूर्य के बिना पृथ्वी पर जीवन सम्भव नही है सूर्य की किरणों से ही पृथ्वी पर प्रकाश आता है यही प्रकाश मनुष्य के जीवन से अंधकार को दूर करता है और हमारे धर्म में पाँच देवताओं की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है -गणेश, दुर्गा ,शिव ,विष्णु और सूर्य । इनमें सूर्य दैव् का विशेष महत्व है क्योंकि वही एक ऐसे देव हैं जिन्हें हम देख सकते है । सूर्य को अर्ध्य क्यों

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भगवान शिव का ध्यान

ध्यानं वन्देअ्हं सकलं कलंक-रोहितं स्थाणोर्मुखं पश्चिमम् । शुभं त्रिलोचनं नाम्ना सद्योजातं शिव पदम् ।। वामदेवं सुवर्णाभं दिव्यास्त्रगण सेवितम् । अजन्मानमुमाकान्तं वन्देअ्हं हि उत्तरं मुखम् ।। बालकं वर्णमारक्तं पुरुषं च तडित्प्रभम् । दिव्यं पिङ्गजटाधारं वन्देअ्हं पूर्वादिक मुखम् ।। मधयाण्हार्क समप्रभं शशिधरं भीमाट्टहासोज्जवलं, त्र्यक्षं पन्नगभूषणं शिखि शिखाश्मश्रु स्फुरन्मूर्धजम् । हस्ताब्जैः त्रिशिखं समुदगरमसिं शक्तिं दधानं विभुं दंष्ट्राभीम चतुर्मुखं पशुपतिं दिव्यास्त्र रूपं शंकरं स्मरेत ।। अर्थात् – जिनकी प्रभा मध्याण्ह सूर्य के समान दिव्य रूप में मासित हो रही है जिनके मस्तक पर चन्द्रमा

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भगवान गणेश की अग्र पूजा क्यों

प्रथम पूजन क्यों हमारी संस्कृति में किसी भी कार्य को करने से पहले या किसी भी उत्सव को मनाने से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है । शास्त्रों के अनुसार सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाए तो हर काम में सफलता प्राप्त होती है । किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले आखिर क्यों गणेश जी का ही पूजन किया जाता है,गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है गणेश जी सभी विघ्नों को हरने बाले

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