राम जी का ध्यान

मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी का चरित्र किसे नहीं भाता !जैसा उन चरित्र है वैसे ही उनके गुणानुवाद हैं ,इन श्लोकों के माध्यम से हम भगवान श्री रामचंद्र जी के गुणों का गान करेंगे ! रामध्यान मंत्र ऊँ आपदामप हर्तारम दातारं सर्व सम्पदाम, लोकाभिरामं श्री रामं भूयो भूयो नामाम्यहम । श्री रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे रघुनाथाय नाथाय सीताया पतये नमः ।। ऊँ मध्याह्ने विष्णुरूपां च तार्क्ष्यस्थां पीतवाससाम् । युवतीं च यजुर्वेदां सूर्यमण्डलसंस्थिताम् ।। ऊँ सायाह्ने शिवरूपां च वृध्दां वृषभवाहिनीम् ।

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दुर्गा ध्यान

माँ दुर्गा अपने पुत्रों पर कृपा बरसाने वाली आदि शक्ति जगदम्बा हैं ,जिन्होंने समय समय पर विभिन्न रूपों में अवतरित होकर,दुष्टों का संहार किया, तथा अपने भक्तों पर कृपा की दृष्टि से धन,धन्य से झोलियाँ भरी है ! माँ चंडी के साधकों के लिए हम यहाँ पूजा में उपर्युक्त होने वाले ध्यान स्तुत्यों का संग्रह कर रहे हैं, स्तुतियों के माध्यम से भवानी अति शीघ्र प्र्शन्न होती हैं! भगवती सिध्दिदात्री का ध्यान वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम । कमलस्थितां चतुर्भुजा

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विष्णु ध्यान

भगवान विष्णु इस सृष्टि के पालन करता हैं,अगर कोई साधक श्रद्धा से भाव से इनकी पूजा करता है तो वह इस लोक में,सुख,समृद्धि,के साथ साथ परलोक में विष्णु लोक को प्राप्त क्र लेता है !भगवान विष्णु की पूजा में प्रयुक्त होने वाले मंत्रों एवं श्लोकों का संग्रह यहाँ किया जा रहा है ! विष्णु ध्यान – ऊँ ध्ययेः सदा सवित्र मण्डल मध्यवर्ती, नारायण सरसिजा सन सन्नि विष्टः । केयूरवान मकरकुण्डलवान किरीटी, हरि हिरण्मय वपुर धृत शंख चक्रः ।। शान्ताकारं भुजगशयनं

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देवी ध्यान

माँ जदम्बा आदि शक्ति के अनेकों रूप है जिनका वर्णन करने में साधारण पुरुष जन्मो जन्मो के प्रयास से भी सफल नहीं हो सकता है !यहां हम माता के विभिन्न रूपों की ध्यान प्रार्थना एवं स्तुतियों का संग्रह हैं !माँ भवानी के उपासकों के लिए दिव्य स्तुतियों का संग्रह यहना उपलब्ध है अगर आप माता की साधना करना चाहते हैं या फिर क्र रहे है तो अपनी नित्य पूजा में माता के इन श्लोकों का उच्चारण आपकी श्रद्धा और सिद्धि

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शिव ध्यान

देवो के देव महादेव जितने भोले है उतनी ही उनकी लीलाओ का वर्णन है,भगवान आशुतोष के नाम से जाने, वाले महादेव अपने भक्तों की गलतियों पर भी संतुष्ट हो जाते हैं! महादेव की शरण भला कौन नहीं जाना चाहता ,इस घोर कलिकाल में भगवान महादेव ही सबकी नय्या वाले है !उन महदेव भगवान को प्रशन्न करना बहुत ही आसान है !जो भक्त श्रद्धा पूजा अर्चना करता है ,वह मनोकामनाओं की पूर्ति भी शीघ्र ही प्राप्त क्र लेता है! तो आईये

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हनुमान जी के ध्यान मंत्र

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुध्दिमतां वरिष्ठ । वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ।। पुष्पांजलि ऊँ रामदूताय विद्महे कपिराजाय धीमहि । तन्नो हनुमान् प्रचोदयात् ।। ऊँ आंजनेयाय विद्महे महाबलाय धीमहि । तन्नो मारुतिः प्रचोदयात् ।। ऊँ अंजनिसुताय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि । तन्नो मारुतिः प्रचोदयात् ।। प्रार्थना नीलोत्पलैः कोकनदैः कल्हारैः कमलैरपि । कुमुदैः पुण्डरी कैस्त्वां पूजयामि कपीश्वरः ।। मल्लिका जाति पुश्पैश्च पाटलैः कुटजैरपि । केतकी बकुलैश्चूतैः पुन्नागैर्नागकेसरैः ।। चम्पकैः शतत्रैश्च करवीरैर्मनोहरैः । पूज्ये त्वां कपि श्रेष्ठ सविल्वै तुलसीदलैः ।। उद्यन्मार्तण्ड कोटि प्रकटरूचियुतं चारूवीरासनस्थं

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सरस्वती ध्यान

सरस्वती माता

विद्या की देवी भगवती सरस्वती हैं,जो साधक अपुपम कवित्व की शक्ति तथा विद्या के क्षेत्र में उन्नति चाहते हैं, उनके लिए माँ सरस्वती की साधना करनी चाहिए! माता सरस्वती की कृपा से गूंगा भी बोलने लग जाता है,और बड़ी बड़ी सुंदर कविताओं की रचना करने लग जाता है! माता सरवती को प्र्शन्न करने के लिए प्रतिदिन उनकी स्तुति करनी चाहिए,और उनका पूजन करके उनसे प्रर्थना करनी चाहिए! आइये जानते है माँ सरस्वती के ध्यान और प्रार्थना के श्लोकों को जिनसे

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गणेश ध्यान

श्री सिद्धि विनायको विजयतेतराम, गणेश भगवान शिव तथा माँ पार्वती के पुत्र हैं,जिनकी पूजा सभी कार्यों में सबसे पहले की जाती है,गणेश जी का पूजन सभी प्रकार के विघ्नों को नाश करने के लिए तथा अविघ्नता पूर्वक अपने कार्य की सिद्धि के लिए किया जाता है,साथ ही भगवान गणेश बुद्धि के दाता हैं उनकी पूजा स्तुति,एवं आराधना से तीव्र बुद्धि की भी प्राप्ति होती है !तो आईये जानते है भगवान गणेश जी के उन मंत्रों,स्तुतियों को जिनसे गणेश भगवान शीघ्र

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महालक्ष्मी ध्यान

माँ लक्ष्मी की पूजा सांसारिक धन जैसे वाहन भूमि पुत्र,घर,इत्यादि सुखों के लिए विजयादशमी या दीपावली के दिन की जाती है !जिनके ऊपर माँ लक्ष्मी की कृपा दृष्टि हो जाती है वह धनं धन्य से भरपूर हो जाता है तथा शत्रु उसका कुछ भी नहीं बिगड़ पाते हैं,तो आइये जानते हैं माँ लक्ष्मी की उन स्तुतियों को जिनसे माता शीघ्र प्रशन्न हो जाती है ! लक्ष्मी माता का ध्यान लक्ष्मी ध्यान मंत्र या सा पद्मासनस्था विपुल-कटि-तटि पद्म -पत्रायताक्षी, गम्भीरार्तव-नाभिः स्तन

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काली ध्यान

काली माता

माँ काली ध्यान खडगम् चक्रगदेषु चापपरिघांछूलं भुशुणडीं शिरः शखं संदधतीं करैस्त्रिनयनां सर्वांगभूषावृताम् । नीलाश्मद्युतिमास्यपाददशकां सेवे महाकालिकां यामस्तौत्स्वपिते हरौ कमलजो हन्तुं मधुं कैटभम्!! भगवान विष्णु के सो जाने पर में और कैटभ को मारने के लिए कमलजन्मा ब्रहमा जी ने जिनका स्तवन किया था उन महाकाली देवी का मै सेवन करता हूँ। वे अपने दस हाथों में खड्ग चक्र गदा बाण धनुष परिघ शूल भूशुण्डि मस्तक और शंख धारण करती है उनके तीन नेत्र हैं वे समस्त अगों में दिव्य आभूषणों

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