कर दर्शन का वैज्ञानिक रहस्य

क्या है कर दर्शन सनातन धर्म वैज्ञानिक रहस्यों से भरा पड़ा है यही कारण है कि इस धर्म का प्रत्येक अंग अपने आप में कुछ न कुछ विशेषता समेटे रखता ही है, आज हम बात कर रहे है कर दर्शन की, कर दर्शन का मतलब है अपने हाथों का दर्शन करना, हमें स्कूल में ही अध्यापक बताने लग जाते हैं कि प्रातः काल उठ कर अपने हाथों का दर्शन करना चाहिए, जिसका मन्त्र है कराग्रे वसते लक्ष्मी करमध्ये सरस्वती। करमूले

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प्रणाम से जुड़े रोचक तथ्य।

 (प्रणाम निवेदन)       प्रणाम निवेदन संस्कार भारतीय सनातन शिष्टाचार का महत्त्वपूर्ण अङ्ग हैं | सामान्यरूपसे अभिवादन दो रूपों में व्यक्त होता हैं |  छोटा अपनेसे बड़ेको प्रणाम करता हैं और समान आयुवाले व्यक्ति एक-दूसरेको नमस्कार करतें हैं | छोटे और बडे़का निर्णय भारतीय संस्कृतिमें त्यागके अनुसार होता हैं | जो जितना त्यागी हैं,वह उतना ही महान् हैं |  शुकदेवजी त्यागके कारण उनके पिता व्यासजीने ही उन्हें अभ्युत्थान दिया और प्रणाम किया | त्यागके अनन्तर विद्या और उसके पश्चात् वर्णका विचार किया

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झाड़ू से जुडी विशेष जानकारी

झाडू से संबंधित बातें झाड़ू को संस्कृत में मार्जनी या मार्जक कहते हैं आप सब जानते ही है की हमारे घर में उपलब्ध हर छोटी से छोटी चीज़ का हमारे जीवन से किसी न कसी तरह का संबंध होता है जिनके प्रयोग से हमारे जीवन पर कभी अच्छे तो कभी बुरे प्रभाव देखने को मिलते है है आज हम आपसे झाडू से संबंध्ति बातो क बारे में बात कर रहे है हमे कब झाडू लगाना चाहिए कब नहीं इसके बारे

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सिन्दूर का महत्व

सिन्दूर की विशेषता

सिन्दूर का महत्व हमारी हिन्दू संस्कृति में सिन्दूर का विशेष महत्ब है सिन्दूर सौभाग्य का प्रतीक है हमरी संस्कृति के प्रत्येक कार्य में सिन्दूर का प्रयोग होता है विवाहित स्त्रियों के सोलह श्रृंगारो में से सिन्दूर विशेष श्रृंगार है शादी के बाद ही विवाहित स्त्रिया सिन्दूर को अपनी मांग में लगाती है क्यूंकि सिन्दूर को सुहाग का प्रतीक माना गया है यहां तक लाल सिन्दूर को माता लक्ष्मी और पार्वती का प्रिय भी कहा जाता है जो औरते मांग में

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सभी शुभ कार्यों में कलश क्यो लगाते है?

सभी शुभ कार्यों में कलश क्यो लगाते है? एक समय जब देवासुर संग्राम हुआ, तब समुद्र में से चौदह रत्नों की उत्पत्ति हुई, उन चौदह रत्नों में अंतिम रत्न था कलश, अर्थात अमृत कलश उस अमृत कलश के कारण पुनः देवताओं और असुरों में संग्राम प्रारम्भ हो गया , जिसे शांत करने के लिए भगवान श्री हरि को मोहिनी रूप लेना पड़ा। तभी से कलश की महत्ता ओर उपयोगिता  प्रारम्भ हो गयी थी, आईये जानते हैं क्यों है कलश पूजनीय?

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