शक्ति – सर्वस्वरूपिणी है

शक्ति – सर्वस्वरूपिणी है वेदोपनिषत पुराणेतिहासादि ग्रन्थों में सर्वत्र देवी की अखण्ड कर अपार महिमा का विवरण वर्णन पायाजाता है , जिससे स्पष्ट होता है कि शक्ति सृष्टि की मूल नाड़ी है , चेतना का प्रवाह है और सर्वव्यापी हैशक्ति की उपासना आज की उपासना नही है , वह अत्यंत प्राचीन हैं , बल्कि अनादि है । भगवत्पादश्रीशंकराचार्य जी ने ” सौन्दर्यलहरी ” में हमारा ध्यान इस और आकर्षित किया है और कहा है – ‘ शिव जबशक्ति से युक्त

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शक्तीपीठों रहस्य

शक्तीपीठ रहस्य पौराणिक कथा है कि दक्ष के यज्ञ में शिव का निमन्त्रण न् होने से उनका अपमान जानकर सती ने उस देहको योग बल से त्याग दिया और हिमालय की पुत्री पार्वती के रूप में शिव पत्नी होने का निश्चय किया । समाचारविदित होने पर शिवजी को बड़ा क्षोभ और मोह हुआ । वे दक्षयज्ञ को नष्ट करके सती के शव को लेकरघूमते रहे । सम्पूर्ण देवताओं ने या सर्वदेवमय विष्णु ने शिव के मोह की शांति एवं साधकों

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सिद्ध पीठों का वर्णन

बंगाल के शक्तिपीठ प्राचीन बंगभूमि , जिसमें वर्तमान बंगलादेश भी सम्मिलित था, परम्परागत रूप से शक्ति उपासना का विशिष्ट केंद्र रही है । दुर्गापूजा यहाँ का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है । इस भू ,भाग में १४ शक्तिपीठ स्थित है । इन सभी सिद्ध पीठों का वर्णन जानने के लिए आप इस पेज पर दी जान वाली जानकारी को अंत तक पढ़ें यह सिद्ध पीठ इस प्रकार है – कालिका सुप्रसिद्ध कलिका सिद्ध पीठ कोलकत्ता पूर्वी भारत का एक

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शक्तिपीठों के प्रादुर्भाव की कथा

शक्तिपीठों के प्रादुर्भाव की कथा तथा उनका परिचय भूतभावन भवानीपति भगवान शंकर जिस प्रकार प्राणियों के कल्याणार्थ विभिन्न तीर्थों में पाषणलिंगरूप में आविर्भूत हुए हैं , उसी प्रकार अनन्तकोटि ब्रह्माण्डात्मक प्रपंच की अधिष्ठानभूता ,सच्चिदानन्दरूपा , करुणामयी , भगवती भी लीलापूर्वक विभिन्न तीर्थों में भक्तों पर कृपा करने हेतु पाषाणरूप से शक्तिपीठों के रूप में विरजमान है । ये शक्तिपीठ साधकों को सिद्धि और कल्याण प्रदान करने वाले हैं । इनके प्रादुर्भाव की कथा पुण्यप्रद तथा अत्यंत रोचक है ! —

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