भगवान शिव का ध्यान

ध्यानं वन्देअ्हं सकलं कलंक-रोहितं स्थाणोर्मुखं पश्चिमम् । शुभं त्रिलोचनं नाम्ना सद्योजातं शिव पदम् ।। वामदेवं सुवर्णाभं दिव्यास्त्रगण सेवितम् । अजन्मानमुमाकान्तं वन्देअ्हं हि उत्तरं मुखम् ।। बालकं वर्णमारक्तं पुरुषं च तडित्प्रभम् । दिव्यं पिङ्गजटाधारं वन्देअ्हं पूर्वादिक मुखम् ।। मधयाण्हार्क समप्रभं शशिधरं भीमाट्टहासोज्जवलं, त्र्यक्षं पन्नगभूषणं शिखि शिखाश्मश्रु स्फुरन्मूर्धजम् । हस्ताब्जैः त्रिशिखं समुदगरमसिं शक्तिं दधानं विभुं दंष्ट्राभीम चतुर्मुखं पशुपतिं दिव्यास्त्र रूपं शंकरं स्मरेत ।। अर्थात् – जिनकी प्रभा मध्याण्ह सूर्य के समान दिव्य रूप में मासित हो रही है जिनके मस्तक पर चन्द्रमा

» Read more

भगवान गणेश की अग्र पूजा क्यों

प्रथम पूजन क्यों हमारी संस्कृति में किसी भी कार्य को करने से पहले या किसी भी उत्सव को मनाने से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है । शास्त्रों के अनुसार सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाए तो हर काम में सफलता प्राप्त होती है । किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले आखिर क्यों गणेश जी का ही पूजन किया जाता है,गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है गणेश जी सभी विघ्नों को हरने बाले

» Read more

प्रातः स्मरण

पुण्य श्लोकों का स्मरण– पुण्यश्लोको नलो राजा पुण्यश्लोको जनार्दनः । पुण्यश्लोको च वैदेही पुण्यश्लोको युधिष्ठिरः।। अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः । कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरजीविनः।। सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेयमथाष्टमम् । जीवेद् वर्षशतं साग्रमपमृत्युविवर्जितः ।। कर्कोटकस्य नागस्य दमयन्त्या नलस्य च । ऋतुपर्णस्य राजर्षेः कीर्तनं कलिनाशनम् ।। प्रह्लादनारदपराशरपुण्डरीकव्यासाम्बरीष- -शुकशौनकभीष्मदाल्भ्यान् । रुक्माङ्गदार्जुनवसिष्ठविभीषणादीन्- पुण्यानिमान् परमभागवतान् नमामि ।। पुण्य श्लोक धर्मो विवर्धति युधिष्ठिरकीर्तनेन पापं प्रणश्यति वृकोदरकीर्तनेन । शत्रुर्विनश्यति धनंजयकीर्तनेन माद्रीसुतौ कथयतां न भवन्ति रोगाः।। वाराणस्यां भैरवो देवः संसारभयनाशनः । अनेकजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति ।। वाराणस्यां पूर्वभागे व्यासो

» Read more

राम जी का ध्यान

मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी का चरित्र किसे नहीं भाता !जैसा उन चरित्र है वैसे ही उनके गुणानुवाद हैं ,इन श्लोकों के माध्यम से हम भगवान श्री रामचंद्र जी के गुणों का गान करेंगे ! रामध्यान मंत्र ऊँ आपदामप हर्तारम दातारं सर्व सम्पदाम, लोकाभिरामं श्री रामं भूयो भूयो नामाम्यहम । श्री रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे रघुनाथाय नाथाय सीताया पतये नमः ।। ऊँ मध्याह्ने विष्णुरूपां च तार्क्ष्यस्थां पीतवाससाम् । युवतीं च यजुर्वेदां सूर्यमण्डलसंस्थिताम् ।। ऊँ सायाह्ने शिवरूपां च वृध्दां वृषभवाहिनीम् ।

» Read more

दुर्गा ध्यान

माँ दुर्गा अपने पुत्रों पर कृपा बरसाने वाली आदि शक्ति जगदम्बा हैं ,जिन्होंने समय समय पर विभिन्न रूपों में अवतरित होकर,दुष्टों का संहार किया, तथा अपने भक्तों पर कृपा की दृष्टि से धन,धन्य से झोलियाँ भरी है ! माँ चंडी के साधकों के लिए हम यहाँ पूजा में उपर्युक्त होने वाले ध्यान स्तुत्यों का संग्रह कर रहे हैं, स्तुतियों के माध्यम से भवानी अति शीघ्र प्र्शन्न होती हैं! भगवती सिध्दिदात्री का ध्यान वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम । कमलस्थितां चतुर्भुजा

» Read more

विष्णु ध्यान

भगवान विष्णु इस सृष्टि के पालन करता हैं,अगर कोई साधक श्रद्धा से भाव से इनकी पूजा करता है तो वह इस लोक में,सुख,समृद्धि,के साथ साथ परलोक में विष्णु लोक को प्राप्त क्र लेता है !भगवान विष्णु की पूजा में प्रयुक्त होने वाले मंत्रों एवं श्लोकों का संग्रह यहाँ किया जा रहा है ! विष्णु ध्यान – ऊँ ध्ययेः सदा सवित्र मण्डल मध्यवर्ती, नारायण सरसिजा सन सन्नि विष्टः । केयूरवान मकरकुण्डलवान किरीटी, हरि हिरण्मय वपुर धृत शंख चक्रः ।। शान्ताकारं भुजगशयनं

» Read more

देवी ध्यान

माँ जदम्बा आदि शक्ति के अनेकों रूप है जिनका वर्णन करने में साधारण पुरुष जन्मो जन्मो के प्रयास से भी सफल नहीं हो सकता है !यहां हम माता के विभिन्न रूपों की ध्यान प्रार्थना एवं स्तुतियों का संग्रह हैं !माँ भवानी के उपासकों के लिए दिव्य स्तुतियों का संग्रह यहना उपलब्ध है अगर आप माता की साधना करना चाहते हैं या फिर क्र रहे है तो अपनी नित्य पूजा में माता के इन श्लोकों का उच्चारण आपकी श्रद्धा और सिद्धि

» Read more

शिव ध्यान

देवो के देव महादेव जितने भोले है उतनी ही उनकी लीलाओ का वर्णन है,भगवान आशुतोष के नाम से जाने, वाले महादेव अपने भक्तों की गलतियों पर भी संतुष्ट हो जाते हैं! महादेव की शरण भला कौन नहीं जाना चाहता ,इस घोर कलिकाल में भगवान महादेव ही सबकी नय्या वाले है !उन महदेव भगवान को प्रशन्न करना बहुत ही आसान है !जो भक्त श्रद्धा पूजा अर्चना करता है ,वह मनोकामनाओं की पूर्ति भी शीघ्र ही प्राप्त क्र लेता है! तो आईये

» Read more

हनुमान जी के ध्यान मंत्र

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुध्दिमतां वरिष्ठ । वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ।। पुष्पांजलि ऊँ रामदूताय विद्महे कपिराजाय धीमहि । तन्नो हनुमान् प्रचोदयात् ।। ऊँ आंजनेयाय विद्महे महाबलाय धीमहि । तन्नो मारुतिः प्रचोदयात् ।। ऊँ अंजनिसुताय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि । तन्नो मारुतिः प्रचोदयात् ।। प्रार्थना नीलोत्पलैः कोकनदैः कल्हारैः कमलैरपि । कुमुदैः पुण्डरी कैस्त्वां पूजयामि कपीश्वरः ।। मल्लिका जाति पुश्पैश्च पाटलैः कुटजैरपि । केतकी बकुलैश्चूतैः पुन्नागैर्नागकेसरैः ।। चम्पकैः शतत्रैश्च करवीरैर्मनोहरैः । पूज्ये त्वां कपि श्रेष्ठ सविल्वै तुलसीदलैः ।। उद्यन्मार्तण्ड कोटि प्रकटरूचियुतं चारूवीरासनस्थं

» Read more

सरस्वती ध्यान

सरस्वती माता

विद्या की देवी भगवती सरस्वती हैं,जो साधक अपुपम कवित्व की शक्ति तथा विद्या के क्षेत्र में उन्नति चाहते हैं, उनके लिए माँ सरस्वती की साधना करनी चाहिए! माता सरस्वती की कृपा से गूंगा भी बोलने लग जाता है,और बड़ी बड़ी सुंदर कविताओं की रचना करने लग जाता है! माता सरवती को प्र्शन्न करने के लिए प्रतिदिन उनकी स्तुति करनी चाहिए,और उनका पूजन करके उनसे प्रर्थना करनी चाहिए! आइये जानते है माँ सरस्वती के ध्यान और प्रार्थना के श्लोकों को जिनसे

» Read more
1 2