काली ध्यान

काली माता

माँ काली ध्यान खडगम् चक्रगदेषु चापपरिघांछूलं भुशुणडीं शिरः शखं संदधतीं करैस्त्रिनयनां सर्वांगभूषावृताम् । नीलाश्मद्युतिमास्यपाददशकां सेवे महाकालिकां यामस्तौत्स्वपिते हरौ कमलजो हन्तुं मधुं कैटभम्!! भगवान विष्णु के सो जाने पर में और कैटभ को मारने के लिए कमलजन्मा ब्रहमा जी ने जिनका स्तवन किया था उन महाकाली देवी का मै सेवन करता हूँ। वे अपने दस हाथों में खड्ग चक्र गदा बाण धनुष परिघ शूल भूशुण्डि मस्तक और शंख धारण करती है उनके तीन नेत्र हैं वे समस्त अगों में दिव्य आभूषणों

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