भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

नांनी नांनी बूंदियां | सावन के हरियाणवी लोकगीत

नांनी नांनी बूंदियां | सावन के हरियाणवी लोकगीत

नांनी नांनी बूंदियां हे सावन का मेरा झूलणा
एक झूला डाला मैंने बाबल के राज में
                       बाबल के राज में

संग की सहेली हे सावन का मेरा झूलणा
नांनी नांनी बूंदियां हे सावन का मेरा झूलना
ए झूला डाला मैंने भैया के राज में
                    भैया के राज में

गोद भतीजा हे सावन का मेरा झूलना
नांनी नांनी बूंदियां हे सावन का मेरा झूलना

साभार--हरियाणा के लोक गीत, हरियाणा साहित्य अकादमी 
संपादक--डॉ साधुराम शारदा

 

 

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