भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

कच्चे नीम्ब की निम्बोली | सावन के हरियाणवी लोकगीत

कच्चे नीम्ब की निम्बोली | सावन के हरियाणवी लोकगीत | Haryanvi Sawan Geet | Teej Lok Geet

कच्चे नीम्ब की निम्बोली सामण कद कद आवै रे
जीओ रे मेरी मां का जाया गाडे भर भर ल्यावै रे
बाबा दूर मत ब्याहियो दादी नहीं बुलाने की
बाब्बू दूर मत ब्याहियो अम्मा नहीं बुलाने की
मौसा दूर मत ब्याहियो मौसी नहीं बुलाने की
फूफा दूर मत ब्याहियो बूआ नहीं बुलाने की
भैया दूर मत ब्याहियो भाभी नहीं बुलाने की
काच्चे नीम्ब की निम्बोली सामणया कद आवै रे
जीओ रे मेरी मां का जाया गाडे भर भय ल्यावै रे

साभार - हरियाणा के लोक गीत 
हरियाणा साहित्य अकादमी, संपादक - डा. साधुराम शारदा

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