भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

नांनी नांनी बूंदियां मीयां | सावन के हरियाणवी लोकगीत

नांनी नांनी बूंदियां मीयां | सावन के हरियाणवी लोकगीत | Haryanvi Sawan Geet | Teej Lok Geet

नांनी नांनी बूंदियां मीयां बरसता हे जी
हां जी काहे चारूं दिसां पड़ेगी फुवार
हां जी काहे सामण आया सुगड़ सुहावणा
संग की सहेली मां मेरी झूलती जी
हमने झूलण का हे मां मेरी चाव जी
हां जी काहे सामण आया सुगड़ सुहावणा
सखी सहेली मां मेरी भाजगी जी
हां जी काहे हम तै तो भाज्या ना जाय
पग की है पायल उलझी दूब में जी
नांनी नांनी बूंदियां मीयां बरसता जी
हां जी काहे चारूं पास्यां पड़ेगी फुवार

साभार - हरियाणा के लोक गीत 
हरियाणा साहित्य अकादमी, संपादक - डा. साधुराम शारदा

 

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