भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

ऊंची एडी बूंट बिलाती | लोकगीत 

ऊंची एडी बूंट बिलाती | लोकगीत | Haryanvi Folk Song | Lok Geet (हरियाणवी लोक साहित्य | Haryanvi Folklore | Haryanvi Folk Literature

ऊंची एडी बूंट बिलाती पहरन खात्तर ल्यादे,
जै तेरे बसकी बात नहीं तो म्हारे घरां खंदा दे।

बाग बेच दे बिरसा बेच दे मन्नै रमझोल घड़ा दे,
जै तेरे बसकी बात नहीं तो म्हारे घरां खंदा दे।

बैल बेच दे भैंस बेच दे साड़ी जम्फर ल्यादे,
जै तेरे बसकी बात नहीं तो म्हारे घरां खंदा दे।

नौहरा बेच दे महल बेच दे मोटरकार मंगा दे,
जै तेरे बसकी बात नहीं तो म्हारे घरां खंदा दे।

साभार - हरियाना प्रदेश का लोकसाहित्य [हिंदोस्तानी एकेडेमी, इलाहाबाद], डॉ शंकर लाल यादव, पृष्ठ १८०

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