भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

जितेंद्र दहिया

जितेंद्र दहिया हलालपुर, सोनीपत से संबंध रखते हैं। हरियाणवी में रचनाएं लिखते हैं।

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