जितेंद्र दहिया साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 2
शर्म लाज कति तार बगायी
शर्म लाज कति तार बगायी या माहरे हरयाने मे किसी तरक्की आयी...!
कट्ठे रह के कोए राजी कोनया ब्याह करते ए न्यारे पाटे हैं,
माँ बाप की कोए सेवा नहीं करता सारे राखन...
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कट्ठे रह के कोए राजी कोनया ब्याह करते ए न्यारे पाटे हैं,
माँ बाप की कोए सेवा नहीं करता सारे राखन...
बचपन का टेम
बचपन का टेम याद आ गया कितने काच्चे काटया करते,
आलस का कोए काम ना था भाजे भाजे हांड्या करते ।
माचिस के ताश बनाया करते कित कित त ठा के ल्याया करते
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आलस का कोए काम ना था भाजे भाजे हांड्या करते ।
माचिस के ताश बनाया करते कित कित त ठा के ल्याया करते