कंवल हरियाणवी साहित्य Hindi Literature Collections of Surdas
कुल रचनाएँ: 2
चोट इतनी... | हरियाणवी ग़ज़ल
चोट इतनी दिल पै खाई सै मनै,
दर्द की दुनिया बसाई सै मनै।
भूल गया मैं अपने आप्पे नै कती,
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दर्द की दुनिया बसाई सै मनै।
भूल गया मैं अपने आप्पे नै कती,
चाल-चलण के घटिया देखे | हरियाणवी ग़ज़ल
चाल-चलण के घटिया देखे बड़े-बड़े बड़बोल्ले लोग,
भारी भरकम दिक्खण आले थे भित्तर तै पोल्ले लोग।
जीवन भर तो खूब सताया खूब करया मेरा अपमान,
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भारी भरकम दिक्खण आले थे भित्तर तै पोल्ले लोग।
जीवन भर तो खूब सताया खूब करया मेरा अपमान,