भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

कंवल हरियाणवी साहित्य Hindi Literature Collections of Surdas

कुल रचनाएँ: 2

कंवल हरियाणवी

चोट इतनी... | हरियाणवी ग़ज़ल

चोट इतनी दिल पै खाई सै मनै,
दर्द की दुनिया बसाई सै मनै।
भूल गया मैं अपने आप्पे नै कती,
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चाल-चलण के घटिया देखे | हरियाणवी ग़ज़ल

चाल-चलण के घटिया देखे बड़े-बड़े बड़बोल्ले लोग,
भारी भरकम दिक्खण आले थे भित्तर तै पोल्ले लोग।
जीवन भर तो खूब सताया खूब करया मेरा अपमान,
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कंवल हरियाणवी का जीवन परिचय (Biography)

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