भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

कवि नरसिंह साहित्य Hindi Literature Collections of Raskhan

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कवि नरसिंह

दीवाळी

कात्तिक बदी अमावस थी और दिन था खास दीवाळी का-
आँख्याँ कै माँह आँसू आ-गे घर देख्या जब हाळी का॥
कितै बणैं थी खीर, कितै हलवे की खुशबू ऊठ रही--
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कवि नरसिंह का जीवन परिचय (Biography)

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