भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

नरेन्द्र गुलिया साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 1

नरेन्द्र गुलिया

वो गाम पुराणे कडै़ गये

वो गाम पुराणे कडै़ गये, वो गाम पुराणे कड़ै गये
वो पहल्यां आली बात नहीं, सुखधाम पुराणे कडै़ गये
वो गाम पुराणे कडै़ गये, वो गाम पुराणे कड़ै गये !
पूरा पढ़ें...
नरेन्द्र गुलिया का जीवन परिचय (Biography)

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।