भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

पं माँगेराम साहित्य Hindi Literature Collections of Tulsidas

कुल रचनाएँ: 3

पं माँगेराम

तेरा बड़ा भाई तेरे भरोसे करग्या 

तेरा बड़ा भाई तेरे भरोसे करग्या,
तनै वचन भरे थे, तू इसा तावला फिरग्या !!टेक!!
13 दिन की अलग छठी बैठी सूं
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सुणों कहाणी हरियाणे की

हरियाणे की कहाणी सुणल्यो दो सौ साल की।
कई किस्म की हवा चालगी नई चाल की ।
एक ढोलकिया एक सारंगिया खड़े रहैं थे
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पं मांगेराम की रागणियां

पं मांगे राम का नाम हरियाणवी लोक साहित्य में एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर है। पं लखमीचंद के इस शिष्य की रागणियां हरियाणा भर में बड़े चाव से आज भी गाई जाती हैं?...
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पं माँगेराम का जीवन परिचय (Biography)

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