भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

विरेन सांवङिया साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 2

विरेन सांवङिया

बचपन

प्यारे थे बचपन के साथी
एक तै बढकै एक हिमाती
चिजै खाण नै सारे डाकी
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नारी सौंदर्य

कोमल बदनी, रात रजनी वा चालै चाल बच्छेरी के सी
भेष दमकता, रूप चमकता ऊठै लहर लच्छेरी के सी
रंग हरे मै गौरा गात जणू पङा दूब पै पाला
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विरेन सांवङिया का जीवन परिचय (Biography)

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