भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

फेर तो मैं सूं राजी...

फेर तो मैं सूं राजी... | हास्य कविता | Haryanvi poem by Rohit Kumar Happy

एक मेरा यार जो होग्या तीस पार
उसकी माँ नै मेरीतै बुलाया, बोल्ली-
रै आपणे यार नै समझा ले, समझा इसनै अख शादी रचा ले।

मैं अपणे यार नै कमरे मैं लेग्या अर्र मौका मिलतेंई उसके गल्ल हो ग्या-

-रै तन्नै के तकलीफ सै?
-शादी क्यूं नी करता?

वा बोल्या--जिस्सी छोरी चाहूं उसी मिलती कोना!
मैं बोल्या--किसी हूर की परी चाहवै म्हानै बी बता दे।

तो उसनै न्यूं बखान करया--

मल्लिका सी हाइट हो
खाती रोटी-राइस हो
दिल से ना टाइट हो
हर्र हरयाणे की पदाइश हो
फेर तो मैं सूं राजी...

चंदरावल सी सुंदर हो
झील जिस्सी आंख हों
लांबे-लांबे बाल उसके
हिरणी सी चाल हो
फेर तो मैं सूं राजी...

कोयल ज्यूं हो बोलती
मिसरी सी घोलती
हरियाणवी मै बतलाती हो
हँसती और हँसाती हो
फेर तो मैं सूं राजी...

 -रोहित कुमार 'हैप्पी'
   न्यूज़ीलैंड

प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी आप करें!

टिप्पणी लिखें (Write a Comment)

CAPTCHA

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।