भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

दिन कद आवेंगें

दिन कद आवेंगें | हरियाणवी लघुकथा | Haryanvi Short Story by Rohit Kumar Happy

"मैं थारे गाम की सड़कां पक्की करवा दयूंगा, अर नवे नलके लगवा दूंगा। मै पूरी कोशश करूंगा गाम मै एक हाई स्कूल खलवाण की।"

नेता जी भाषण देण लगरे थे, इलक्शना के दिन थे। वा टैम ग्या तो फेर नेता जी कड़ै? अर नलके अर सड़का किसकी?

पांच साल बाद नेताजी फेर भाषण देण लगरे सैं, "मैं थारे गाम की सड़का...............। इलक्शना के दिन सै।

इलैक्शना के दिन तो पांच साल बाद आए जांवै पर नलके लगवाण अर सड़का पक्की कराण के दिन पता नी कद आवैगें?

--रोहित कुमार 'हैप्पी'

प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी आप करें!

टिप्पणी लिखें (Write a Comment)

CAPTCHA

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।