जैमिनी हरियाणवी साहित्य Hindi Literature Collections of Kabir
कुल रचनाएँ: 2
गोरी म्हारे गाम | कविता
गोरी म्हारे गाम की चाली छम-छम।
गलियारा भी कांप गया मर गए हम।।
आगरे का घाघरा गोड्या नै भेड़ै
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गलियारा भी कांप गया मर गए हम।।
आगरे का घाघरा गोड्या नै भेड़ै
ओ मेरी महबूबा | हास्य कविता
ओ मेरी महबूबा, महबूबा-महबूबा
तू मन्नै ले डूबी, मैं तन्नै ले डूब्या।
मैं समझ गया तनै हिरणी,
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तू मन्नै ले डूबी, मैं तन्नै ले डूब्या।
मैं समझ गया तनै हिरणी,