भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

जैमिनी हरियाणवी साहित्य Hindi Literature Collections of Kabir

कुल रचनाएँ: 2

जैमिनी हरियाणवी

गोरी म्हारे गाम | कविता

गोरी म्हारे गाम की चाली छम-छम।
गलियारा भी कांप गया मर गए हम।।
आगरे का घाघरा गोड्या नै भेड़ै
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ओ मेरी महबूबा | हास्य कविता

ओ मेरी महबूबा, महबूबा-महबूबा
तू मन्नै ले डूबी, मैं तन्नै ले डूब्या।
मैं समझ गया तनै हिरणी,
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जैमिनी हरियाणवी का जीवन परिचय (Biography)

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