भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

रिसाल जांगड़ा साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 2

रिसाल जांगड़ा

मिली अंधेरे नै सै छूट | हरियाणवी ग़ज़ल

मिली अंधेरे नै सै छूट
रह्या उजाले नै यू लूट
उसका पक्कम सत्यानाश
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झूठा माणस मटक रह्या सै | हरियाणवी ग़ज़ल

झूठा माणस मटक रह्या सै,
सूली पै सच लटक रह्या सै ।
जिसनै मैहणत करी बराबर,
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रिसाल जांगड़ा का जीवन परिचय (Biography)

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