रिसाल जांगड़ा साहित्य Hindi Literature Collections
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मिली अंधेरे नै सै छूट | हरियाणवी ग़ज़ल
मिली अंधेरे नै सै छूट
रह्या उजाले नै यू लूट
उसका पक्कम सत्यानाश
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रह्या उजाले नै यू लूट
उसका पक्कम सत्यानाश
झूठा माणस मटक रह्या सै | हरियाणवी ग़ज़ल
झूठा माणस मटक रह्या सै,
सूली पै सच लटक रह्या सै ।
जिसनै मैहणत करी बराबर,
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सूली पै सच लटक रह्या सै ।
जिसनै मैहणत करी बराबर,