भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

संदीप कंवल भुरटाना साहित्य Hindi Literature Collections of Suryakant Tripathi Nirala

कुल रचनाएँ: 4

संदीप कंवल भुरटाना

गया बख्त आवै कोन्या

गया बख्त आवै कोन्या, ना रहरे माणस श्याणे
पहल्म बरगा प्यार रहया ना, इब होरे दूर ठिकाणे॥
पहले जैसा कोन्या रहया, यार और व्यवहार कती
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मुर्रा नस्ल की भैंस | कविता

म्हारे हरियाणे की या आन-बान-शान सै।
मुर्रा नस्ल की झोटी का जग म्हं नाम सै ।।
मुर्रा नस्ल की भैंस म्हारी बाल्टा दूध का ठोकै सै,
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मन्नै छोड कै ना जाइए | कविता

मन्नै छोड कै ना जाइए,
मेरे रजकै लाड़ लड़ाइए,
अर मन्नै इसी जगां ब्याइए,
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बुढ़ापा बैरी आग्या इब यो | कविता

बुढ़ापा बैरी आग्या इब यो, रही वा जकड़ कोन्या।
छाती तान के चाला करता, रही वा अकड़ कोन्या।।
जवानी टेम यो खेत म्हं हाली, रहया था पूरे रंग म्हं,
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संदीप कंवल भुरटाना का जीवन परिचय (Biography)

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