भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

सत्यवीर नाहड़िया साहित्य Hindi Literature Collections

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सत्यवीर नाहड़िया

एक बख़त था...

एक बख़त था, गाम नै माणस, राम बताया करते।
आपस म्हं था मेलजोल, सुख-दुख बतलाया करते।
माड़ी करता कार कोई तो, सब धमकाया करते।
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सत्यवीर नाहड़िया का जीवन परिचय (Biography)

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