श्रीकृष्ण गोतान मंजर साहित्य Hindi Literature Collections of Ajneya
कुल रचनाएँ: 2
बाट | हरियाणवी गीत
कोये ना कोये बात सै।
मेरी मायड़ जी हुलसावै॥
खड़ी धूप मैं बाल सँवारूँ-काग मँडेरै बोलै
पूरा पढ़ें...
मेरी मायड़ जी हुलसावै॥
खड़ी धूप मैं बाल सँवारूँ-काग मँडेरै बोलै