भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

श्रीकृष्ण गोतान मंजर साहित्य Hindi Literature Collections of Ajneya

कुल रचनाएँ: 2

श्रीकृष्ण गोतान मंजर

बाट | हरियाणवी गीत

कोये ना कोये बात सै।
मेरी मायड़ जी हुलसावै॥
खड़ी धूप मैं बाल सँवारूँ-काग मँडेरै बोलै
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हरियाणा | हरियाणवी गीत

सब सै निराला हरियाणा
दूध घी का सै खाणा॥
कुरुछेतर महाभारत भूमि
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श्रीकृष्ण गोतान मंजर का जीवन परिचय (Biography)

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