भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

सतपाल स्नेही साहित्य Hindi Literature Collections

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सतपाल स्नेही

क्यूँ अपणे हाथों भाइयाँ का लहू बहावै सै

क्यूँ अपणे हाथों भाइयाँ का लहू बहावै सै
क्याँ ताहीं तू इतना एण्डीपणा दिखावै सै
जाण लिये तू एक दिन इसमै आप्पै फँस ज्यागा
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सतपाल स्नेही का जीवन परिचय (Biography)

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