भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

रोहित कुमार 'हैप्पी' साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 18

रोहित कुमार 'हैप्पी'

हरियाणवी भाषा

हरियाणवी (हरयाणवी) भाषा मूलत: हिंदी की ही एक बोली है और यह हरियाणा की मूल बोली है। हरियाणवी के अधिकतर शब्द ब्रज-भाषा से मिलते-जुलते हैं।
यूं तो हरियाणवी मे?...
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सफर

"बापू पांच कोस पैदल चलना पड़ै स्कूल जाण खातर। एक सैकल दवा दे।"
'बेटे इबकी साढियां मैं जरूर दवाऊंगा।' हरिया अपणे छोरे नै विश्वास दवाण लग रया था। छोरा भी चुप्...
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देसी गाय की नस्लें

ऊँचे स्कंध, झूलता गलावलंब और पीठ पर सूर्यकेतु स्नायु देसी नसल की पहचान है।
देसी गाय की नस्लों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
दुधारू नस्ल--?...
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साहिवाल गाय | Sahiwal Desi Cow

सहिवाल
सहिवाल गायों में अफगानिस्तानी तथा गीर जाति का रक्त पाया जाता है। इन गायों का सिर चौड़ा, सींग छोटी और मोटी, तथा माथा मझोला होता है। ये स्वंत्रता पूर...
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दिन कद आवेंगें

"मैं थारे गाम की सड़कां पक्की करवा दयूंगा, अर नवे नलके लगवा दूंगा। मै पूरी कोशश करूंगा गाम मै एक हाई स्कूल खलवाण की।"
नेता जी भाषण देण लगरे थे, इलक्शना के दि?...
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नवी खबर

मैं चा आळे की दुकान पर बैठया चा की चुस्की मारदे-मारदे, अखबार पढण लगरया था। मेरी जड़ मै बेठया एक अनपढ़ सा बुजर्ग पूछण लगया, "रै बेट्टा सुणा कोई नवी खबर?"
"देश भ?...
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या दुनिया

एक ब एक बूढ़ा सा माणस अर उसका छोरा दूसरे गाम जाण लागरे थे। सवारी वास्तै एक खच्चर ह था। दोनो खच्चर पै सवार होकै चाल पड़े। रास्ते मैं कुछ लोग देख कै बोल्ले, "र?...
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हरियाणवी दोहे

मोबाइल प लगा रहै, दिनभर करै चैबोळ। 
काम कदे करता नहीं, सै बेट्टा बंगलोळ॥ 
 
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हरियाणे का छौरा देख

हरियाणे का छौरा देख
लाम्बा, चौड़ा गौरा देख
...........हरियाणे का छौरा देख!
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साजण तो परदेस बसै

साजण तो परदेस बसै मैं सुरखी, बिंदी के लाऊं
सामण बी इब सुहावै ना, मैं झूला झूलण के जाऊं
नणदी बेशक सै प्यार करै, सासू बी कम ना लाड करै
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आग्या मिल गय्या तन्नैं बेल | हरियाणवी ग़ज़ल

आग्या मिल गय्या तन्नैं बेल
लिकड़ चुकी सै कदकी रेल
जिब चावै आजाद घूम तौं
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बाजरे की रोटी

बाजरे की रोटी ना थ्यावै कदै साग
हो गै परदेसी जणूं फूट्टे म्हारे भाग
सुणती कदे ना इब पायल की छम-छम
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हरियाणे का नाम बणावैं

दूध-दहीं हम मक्खण खांवैं
हरियाणे का नाम बणावैं
हरियाणे का नाम बणावैं
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फेर तो मैं सूं राजी...

एक मेरा यार जो होग्या तीस पार
उसकी माँ नै मेरीतै बुलाया, बोल्ली-
रै आपणे यार नै समझा ले, समझा इसनै अख शादी रचा ले।
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लाड सै, दुलार सै--दोगाना

लाड सै, दुलार सै
आँखां के मैं प्यार सै
छोड़ मत जाइयै तू
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चल हाल रै उठ कै चाल...

चल हाल रै उठ कै चाल बड़ी सै दूर रै जाणा
उडै चाहे धूल
सै मंजल दूर
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हुड्डा हो, चौटाला हो

हुड्डा हो, चौटाला हो
कदै न घोटाळा हो
हाँ, कदै न घोटाळा हो.....
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लगा बुढेरा एक बताण

लगा बुढेरा एक बताण
आपस मै ना करो दुकाण
लगा बुढेरा एक बताण......
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रोहित कुमार 'हैप्पी' का जीवन परिचय (Biography)

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